दुनिया भर में सभी लोगों के घरों में कई ऐसा उपकरण मौजूद होते हैं जो सिर्फ बिजली से चलते हैं. जिन घरों में बहुत ज्यादा बिजली इस्तेमाल की जाती है उन घरों का बिजली बिल काफी आता है. इसी परेशानी से बचने के लिए अब बहुत से घरों में सोलर पैनल इंस्टॉल करवाए जा रहे हैं. भारत में इसके लिए पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना भी चलाई जा रही है. जिसमें सोलर पैनल इंस्टॉल करवाने पर सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है. सोलर पैनल तकनीक में भी अब बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है.
पारंपरिक सिलिकॉन सोलर पैनल की जगह अब बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने के लिए अमेरिकी टेक और एनर्जी कंपनियां मिलकर ऐसे एडवांस सोलर पैनल बाजार में उतार रही हैं. जो पारंपरिक पैनलों के मुकाबले काफी ज्यादा बिजली बनाते हैं और उनकी उम्र भी बहुत लंबी होती है. चलिए आपको बताते हैं कि इन नए सोलर पैनलों में ऐसा क्या खास है और यह कैसे पुराने मॉडल्स से बिल्कुल अलग साबित हो रहे हैं.

कैसे काम करेगी नई टैंडम सोलर टेक्नोलाॅजी?
इन नए और एडवांस्ड सोलर पैनलों के पीछे जो सबसे बड़ी तकनीक काम कर रही है. उसे पेरोव्हस्काइट-सिलिकॉन टैंडम तकनीक कहा जाता है. पारंपरिक सोलर पैनल में सिर्फ एक ही परत होती है. लेकिन इन नए टैंडम पैनलों में दो अलग-अलग लाइट-एब्जॉर्बिंग लेयर्स को आपस में जोड़ा जाता है. ऊपर वाली परत पेरोव्हस्काइट क्रिस्टल की होती है.
जो धूप के हाई-एनर्जी स्पेक्ट्रम को खींचती है जबकि नीचे पारंपरिक सिलिकॉन लेयर होती है जो बची हुई रोशनी को कैप्चर करती है. इस डबल परत की वजह से यह पैनल सूरज की किरणों का बहुत बड़ा हिस्सा बिजली में बदल देते हैं. जिससे इनकी एफिशिएंसी पुरानी तकनीक के मुकाबले 25 से 30 प्रतिशत तक ज्यादा बढ़ जाती है.

