दुनिया में कहीं भी जाने की आजादी सिर्फ टिकट से नहीं मिलती, असली ताकत आपके पासपोर्ट में छिपी होती है. कोई देश बिना वीजा के दरवाजा खोल देता है तो कहीं लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. आखिर ये फर्क क्यों है और कौन तय करता है कि किस देश का पासपोर्ट ज्यादा ताकतवर है और किसका कम? हालिया रैंकिंग में भारत ने बड़ी छलांग लगाई है. आइए समझते हैं कि पासपोर्ट रैंकिंग का पूरा खेल कैसे चलता है और इसमें कौन-कौन से पैमाने काम करते हैं.
पासपोर्ट रैंकिंग आखिर होती क्या है?
जब हम किसी देश के पासपोर्ट की रैंकिंग की बात करते हैं तो इसका सीधा मतलब होता है कि उस पासपोर्ट से दुनिया के कितने देशों में बिना पहले से वीजा लिए यात्रा की जा सकती है. यह रैंकिंग बताती है कि किसी देश के नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा में कितनी आसानी मिलती है. यह सूची हर साल अलग-अलग संस्थान जारी करते हैं. इनमें सबसे चर्चित है Henley & Partners द्वारा जारी Henley Passport Index, जो अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा संघ यानी International Air Transport Association के विश्वसनीय डेटा के आधार पर पासपोर्ट की ताकत मापता है.
सीधे शब्दों में कहें तो जितने ज्यादा देशों में आप बिना वीजा या आसान प्रक्रिया से जा सकते हैं, आपका पासपोर्ट उतना ही ऊपर रैंक करता है.
किन आधारों पर तय होती है रैंकिंग?
1. वीजा-फ्री एंट्री
सबसे अहम पैमाना यही है कि किसी देश के नागरिक कितने देशों में बिना वीजा के प्रवेश कर सकते हैं. अगर पासपोर्ट दिखाते ही एंट्री मिल जाती है तो वह देश उस पासपोर्ट को एक पॉइंट देता है.

2. वीजा-ऑन-अराइवल
कई देश पहले से वीजा की शर्त नहीं रखते, लेकिन पहुंचने के बाद एयरपोर्ट पर वीजा जारी करते हैं. इसे वीजा-ऑन-अराइवल कहा जाता है. ऐसे हर देश के लिए भी एक अंक जोड़ा जाता है.
3. ई-वीजा या ईटीए
डिजिटल दौर में कई देश ऑनलाइन वीजा या इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन जारी करते हैं. अगर प्रक्रिया आसान और तेज है, तो उसे भी सकारात्मक माना जाता है.
4. कुल गंतव्य देशों की संख्या
हेनले इंडेक्स 199 पासपोर्टों की तुलना 227 संभावित गंतव्यों से करता है. हर वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल गंतव्य पर एक पॉइंट मिलता है. जिसके सबसे ज्यादा पॉइंट, वह सूची में ऊपर.
कूटनीति और अर्थव्यवस्था का असर
पासपोर्ट की ताकत सिर्फ पर्यटन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि दो देशों के बीच मजबूत कूटनीतिक संबंध, व्यापारिक साझेदारी, सुरक्षा सहयोग और राजनीतिक स्थिरता भी अहम भूमिका निभाते हैं. अगर कोई देश आर्थिक रूप से मजबूत, राजनीतिक रूप से स्थिर और सुरक्षा के लिहाज से भरोसेमंद माना जाता है, तो उसके नागरिकों को दूसरे देश ज्यादा भरोसे के साथ प्रवेश देते हैं. यही कारण है कि विकसित देशों के पासपोर्ट अक्सर शीर्ष स्थानों पर रहते हैं.
भारत की रैंकिंग में ताजा बदलाव
फरवरी 2026 की ताजा रैंकिंग में भारतीय पासपोर्ट 75वें स्थान पर पहुंच गया है. यह पिछले साल की तुलना में बड़ा सुधार है. 2025 में भारत 85वें स्थान पर था, फिर 80वें पर आया और अब 75वें स्थान पर पहुंच गया है. यानी इस साल अब तक 10 पायदान की छलांग लगाई है. फिलहाल भारतीय नागरिक 56 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं. इनमें एशिया, अफ्रीका, कैरेबियन और ओशिनिया के कई देश शामिल हैं.
हालांकि, यह भारत की अब तक की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग नहीं है. ऐतिहासिक तौर पर 2006 में भारत 71वें स्थान पर रहा था. उसके बाद गिरावट आई, लेकिन अब फिर सुधार के संकेत दिख रहे हैं.
