आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को लेकर जिस बात का डर जताया जा रहा था, वह सच होते दिख रही है. एआई सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रही है और अब यह मुश्किल से मुश्किल काम को चुटकियों में पूरा कर देती है. पिछले कुछ महीनों पर नजर डालें तो एआई तेजी से एडवांस्ड होती जा रही है, जिसे देखते हुए एक्सपर्ट्स से चेतावनी देना शुरू कर दिया है. एआई के गॉडफादर कहे जाने वाले कनाडा के कंप्यूटर साइंटिस्ट योशुआ बेंगियो ने कहा है कि एआई इंसानी कंट्रोल से बाहर होना शुरू हो गई है.

बेंगियों ने कही यह बात
एआई में तेजी से हो रहे एडवांसमेंट को देखते हुए बेंगियो समेत 100 से अधिक रिसर्चर ने कहा है कि एआई कंपनियों को सेफ्टी पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. हाल ही में रिलीज हुई 2026 इंटरनेशनल एआई सेफ्टी रिपोर्ट में इन रिसर्चर ने कहा है कि पावरफुल एआई बनाते समय कंपनियों को अपने प्रॉफिट से ज्यादा सेफ्टी को आगे रखना चाहिए. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अब जनरल यूज वाले एआई मॉडल PhD-level के साइंटिस्ट के बराबर नॉलेज रखते हैं. इन्हें काम करने के लिए इंसानी इनपुट की बहुत कम जरूरत रह गई है. अभी दुनियाभर में हर हफ्ते 70 करोड़ लोग एडवांस्ड एआई टूल्स का यूज कर रहे हैं और यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.
एआई के साथ ही बढ़ रहे हैं रिस्क
एक्सपर्ट्स ने वार्निंग दी है कि एआई के साथ-साथ रिस्क भी बढ़ रहे हैं. अब साइबर क्राइम के मामलों में इजाफा देखा जा रहा है और ऐसे लगभग 90 प्रतिशत मामलों में एआई का यूज किया जा रहा है. इसी तरह बायोटेक्नोलॉजी में कुछ सिस्टम ने इंसानों को पीछे छोड़ दिया है. इससे बीमारियों से बचाव में मदद मिलेगी, लेकिन इसका दुरुपयोग कर इससे बायोलॉजिक हथियार डेवलप किए जाने का खतरा भी बढ़ गया है.
