भारत और पाकिस्तान के ऑटो सेक्टर की तुलना अक्सर चर्चा में रहती है. जहां भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बन चुका है, वहीं पाकिस्तान का ऑटो बाजार आकार और प्रोडक्शन दोनों ही मामलों में काफी छोटा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान में भारत से बनने वाली कारें बिकती हैं और वहां किन कंपनियों का दबदबा है. चलिए तो आज हम आपको बताते हैं कि क्या पाकिस्तान में भारत की कारें बिकती हैं और पाकिस्तान में किन-किन कंपनियों के शोरूम है.
पाकिस्तान में किन कारों का दबदबा?
पाकिस्तान के पास ऐसी कोई पूरी तरह स्वदेशी ऑटोमेकर कर कंपनी नहीं है जो कार के डिजाइनिंग से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक का पूरा काम खुद करती हो. वहां ज्यादातर कारें विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी में स्थानीय स्तर पर असेंबल की जाती है. आपको बता दें कि पाकिस्तान में सबसे बड़ी कार ब्रांड कंपनी पाक सुजुकी मोटर्स है जो सुजुकी ब्रांड की कारों को असेंबल कर बेचती हैं. मेहरान, बोलान, कल्टस और स्विफ्ट जैसे मॉडल यहां काफी पॉपुलर रहे हैं. इनके अलावा टोयोटा इंडस मोटर कंपनी टोयोटा और दाइहात्सु की गाड़ियों को असेंबल करती है. टोयोटा कोरोला और फॉर्च्यूनर वहां भरोसेमंद सेडान और एसयूवी के तौर पर जाने जाती है. इसके अलावा कोरियाई ब्रांड की बात करें तो लकी मोटर कॉरपोरेशन किआ और प्यूजो जैसी कंपनियों के साथ मिलकर गाड़ियां असेंबल करती है. इनका प्लांट कराची में है. यह कंपनी किआ स्पोर्टेज, पिकांटो, सोरेंटो, स्टोनिक और प्यूजो 2008 जैसे मॉडल असेंबल करती है. वहीं होंडा भी पाकिस्तान में सक्रिय है और सिटी व सिविक जैसे मॉडल वहां पसंद किए जाते हैं.

क्या भारत में बनी कारें पाकिस्तान में भी बिकती हैं?
भारत में बनी कारें आमतौर पर सीधे पाकिस्तान में नहीं भेजी जाती है, क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापारिक प्रतिबंध है. हालांकि कई मॉडल ऐसे प्लेटफार्म पर आधारित है, जो भारत में भी लोकप्रिय है. उदाहरण के तौर पर भारत में बिकने वाली मारुति सुजुकी सेलेरियो पाकिस्तान में सुजुकी कल्टस नाम से बेची जाती है. दोनों गाड़ियां एक ही प्लेटफार्म पर आधारित है, लेकिन पाकिस्तान में अभी पुराना मॉडल उपलब्ध है. इस तरह सुजुकी ऑल्टो और जिम्नी जैसे मॉडल भी वहां आम है, हालांकि उनका स्थानीय असेंबली के जरिए प्रोडक्शन होता है.
पाकिस्तान में कारों की बिक्री की कंडीशन कैसी है?
पाकिस्तान का ऑटो बाजार इस समय आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है. मार्च 2025 में वहां कुल मिलाकर 11,000 के आसपास कारें पिकअप और हल्के कमर्शियल वाहन बिके. वहीं भारत में इस अवधि में लाखों यूनिट की बिक्री दर्ज की गई है. इसके अलावा सीमित मांग और आर्थिक दबाव के कारण पाकिस्तान में कई कंपनियों को अस्थायी रूप से प्रोडक्शन रोकना पड़ा है. वहीं दोपहिया बाजार में भी कंडीशन बहुत अलग नहीं है, जहां भारत में लाखों यूनिट की बिक्री होती है वहीं पाकिस्तान की महीने की बिक्री उससे काफी कम है.
