समुद्र के बीचों-बीच बसा एक छोटा सा द्वीप, जहां पहुंचना आसान है, लेकिन हर किसी के लिए दरवाजे खुले नहीं हैं. यहां प्रकृति है, सन्नाटा है, सुकून है… लेकिन एक सख्त नियम भी है कि पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है. आखिर क्यों बनाई गई ऐसी जगह? क्या है इसका मकसद? और क्या सच में यह दुनिया का इकलौता आइलैंड है जहां मर्दों को जाने की इजाजत नहीं? आइए जानते हैं इस अनोखी जगह की पूरी कहानी.
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यह द्वीप फिनलैंड के दक्षिणी तट पर बाल्टिक सागर में स्थित है. इसका नाम है सुपरशी आइलैंड (SuperShe Island). करीब 8.4 एकड़ में फैला यह निजी द्वीप घने पेड़ों और शांत समुद्री माहौल से घिरा हुआ है.
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यह कोई रहस्यमयी या प्रतिबंधित सरकारी इलाका नहीं, बल्कि एक निजी वेलनेस रिट्रीट है, जिसे खास तौर पर महिलाओं के लिए तैयार किया गया है.
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इस आइलैंड की स्थापना टेक इंडस्ट्री की पूर्व सीईओ क्रिस्टिना रोथ ने की थी. उनका मकसद था ऐसी जगह बनाना, जहां महिलाएं बिना किसी सामाजिक दबाव के खुद पर ध्यान दे सकें. यहां योग, मेडिटेशन, हेल्थ सेशन और प्राकृतिक माहौल में आराम करने की सुविधाएं दी जाती हैं.
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क्रिस्टिना रोथ का मानना था कि कई महिलाएं छुट्टियों में भी अपने लुक, व्यवहार या सामाजिक अपेक्षाओं को लेकर सजग रहती हैं. इसलिए उन्होंने ऐसा स्पेस तैयार किया, जहां महिलाएं पूरी तरह सहज होकर समय बिता सकें. इसी सोच के तहत पुरुषों के प्रवेश पर रोक लगाई गई.
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यह कोई बड़ा रिसॉर्ट नहीं है. यहां एक बार में सीमित संख्या में, लगभग 8 महिलाएं ही रुक सकती हैं. यहां आने वाली महिलाएं दुनिया के अलग-अलग देशों से आती हैं. शर्त यह है कि वे यहां अपने पद, पहचान या स्टेटस से ज्यादा खुद के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें.
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क्योंकि यह एक निजी संपत्ति है, इसलिए मालिक को अपने नियम तय करने का अधिकार है. यह कोई सरकारी कानून नहीं है कि पुरुष यहां नहीं जा सकते, बल्कि यह एक प्राइवेट रिट्रीट पॉलिसी है.
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दुनिया के कई हिस्सों में महिला-विशेष क्लब या स्पेस पहले से मौजूद हैं, और सुपरशी आइलैंड भी उसी तरह का एक कॉन्सेप्ट है.
