Galaxy S26: सैमसंग के Galaxy S26 को इस साल फरवरी में लॉन्च किया गया था और अब इसकी जमकर बिक्री हो रही है. लॉन्चिंग के करीब छह महीने गुजरने के बाद भी इस डिवाइस का क्रेज कम नहीं हो रहा है. सैमसंग ने बताया है कि दक्षिण कोरिया में Galaxy S26 की बिक्री Galaxy S25 के मुकाबले दोगुना हो गई है. बाकी जगहों पर भी इसकी खूब डिमांड है, जिसके चलते कंपनी को इसका प्रोडक्शन बढ़ाना पड़ा है. आइए जानते हैं कि लेटेस्ट मॉडल को छोड़कर लोग क्यों एक साल से भी पुराने इस फोन के पीछे पागल हो रहे हैं.
ये हैं Galaxy S26 के फीचर्स
Galaxy S26 में 6.3 इंच का FHD+ Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले दिया गया है. इसमें गैलेक्सी के लिए कस्टमाइज किया गया Exynos 2600 प्रोसेसर लगा है. इसके रियर में 50MP+12MP+10MP का ट्रिपल कैमरा सेटअप और फ्रंट में 12MP का सेंसर लगा हुआ है. कंपनी ने इसमें 4,300mAh का बैटरी पैक दिया है. भारत में इसकी शुरुआती कीमत 87,999 रुपये है.

क्या हैं Galaxy S26 की बिक्री बढ़ने के कारण?
Galaxy S26 का सबसे बड़ा कारण apking Galaxy S26 sirij की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी है. लोगों को लग रहा है कि स्टोरेज और मेमोरी चिप्स की लागत बढ़ने के कारण Galaxy S27 सीरीज महंगी कीमतों पर लॉन्च होगी. प्राइस हाइक से बचने के लिए लोग अभी Galaxy S26 को दमदार ऑप्शन के तौर पर देख रहे हैं. इसका दूसरा कारण यह है कि कई ग्राहक नए फ्लैगशिप मॉडल को लॉन्च होते ही खरीदने से बचते हैं. दरअसल, लॉन्चिंग के समय सैमसंग नए डिवाइस पर कोई डिस्काउंट या कोई दूसरा फायदा नहीं देती है. इसलिए लोग कुछ महीने इंतजार करते हैं. अब इस फोन की लॉन्चिंग को लगभग छह महीने होने वाले हैं और इतने ही समय बाद नई सीरीज लॉन्च हो जाएगी. इस समय कंपनी अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए डिस्काउंट और प्रमोशन ऑफर लाती है, जो ग्राहकों के लिए फायदे का सौदा बन जाते हैं.
क्यों बढ़ने वाली है नए फोन की कीमत?
पिछले कुछ महीनों से देश और दुनिया में फोन लगातार महंगे होते जा रहे हैं. प्राइस हाइक के इस असर से ऐप्पल और सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियां भी नहीं बच पाई हैं. दरअसल, एआई डेटा सेंटरों के लिए स्टोरेज और मेमोरी चिप्स की डिमांड बढ़ रही है. चिप निर्माता कंपनियां इस डिमांड को पूरा करने में लगी हैं और उनका ध्यान कंज्यूमर मार्केट से हट गया है. इस कारण मोबाइल और लैपटॉप आदि के लिए मेमोरी चिप की सप्लाई कम हो गई है और इनके दाम आसमान छूने लगे हैं. इस कारण फोन बनाने वाली कंपनियों की लागत भी बढ़ गई है और इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है.
