झीरम घाटी हमले के मामले में NIA की विशेष अदालत ने बुधवार (16 सितंबर) को बड़ा फैसला सुनाते हुए 10 दोषी माओवादी कैडरों को मौत की सजा सुनाई है. अदालत ने 5 सितंबर को ही इन सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था. बुधवार को सजा की अवधि पर सुनवाई के बाद फांसी की सजा सुनाई गई.
25 मई 2013 को बस्तर में हुई थी घटना
यह मामला 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के दरभा इलाके में हुए झीरम घाटी हमले से जुड़ा है. उस समय कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ का काफिला NH-221 से गुजर रहा था. एनआईए के मुताबिक, हथियारबंद CPI (Maoist) कैडरों ने काफिले को निशाना बनाकर पहले IED धमाका किया और फिर अंधाधुंध फायरिंग और ग्रेनेड से हमला किया.

झीरम घाटी हमले में 24 लोगों की गई थी जान
हमले में मौके पर 24 नागरिकों और पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी, जबकि 35 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. बाद में घायलों में से तीन और लोगों ने दम तोड़ दिया. हमले के बाद माओवादी कैडर मृतकों और घायलों से हथियार, गोलियां, वॉकी-टॉकी, मोबाइल फोन और दूसरी चीजें भी ले गए थे.
NIA ने 39 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की थी चार्जशीट
एनआईए ने इस मामले में कुल 39 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. पहली चार्जशीट 25 सितंबर 2014 को 9 आरोपियों के खिलाफ और सप्लीमेंट्री चार्जशीट 28 सितंबर 2015 को 30 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की गई थी. इनमें से एक आरोपी की न्यायिक हिरासत के दौरान मौत हो गई थी.

झीरम घाटी हमले में 101 गवाहों के बयान दर्ज
पहले फेज में 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई पूरी हुई. इस दौरान 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. एनआईए की जांच के मुताबिक, प्रतिबंधित संगठन CPI (Maoist) के हथियारबंद कैडरों ने स्थानीय कमेटियों और डिवीजनों के साथ मिलकर कांग्रेस नेताओं और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की साजिश रची थी. एनआईए ने इसे माओवादियों की टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन (TCOC) से जोड़कर बताया है.
