विधानसभा के मानसून सत्र के समापन के बाद प्रदेश में नक्सलवाद को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नक्सलवाद के खात्मे का श्रेय अपनी सरकार की नीतियों को दिया, जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर पिछली सरकार ने प्रभावी कार्रवाई की होती तो प्रदेश में इतनी बड़ी संख्या में नक्सली नहीं बचे होते. इस दौरान रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बना.
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी सरकार के दौरान नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए. 600 गांवों को नक्सल प्रभाव से मुक्त कराया गया और बस्तर में विकास कार्यों के जरिए लोगों का विश्वास जीता गया.

उन्होंने दावा किया कि कोंडागांव को नक्सल मुक्त घोषित किया गया था और नक्सली केवल बीजापुर व अबूझमाड़ के सीमित इलाकों तक सिमट गए थे.
रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर भी भूपेश बघेल ने सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार के पास ऐसे लोगों की संख्या का कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठाया जाता है.
