भले ही आज की तारीख में दुनिया में सुरक्षा और शांति की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन असलियत यह है कि आज भी धरती विनाश और बारूद के ढेर पर बैठी हुई है. अगर आपसे पूछा आए कि दुनिया के किस देश के पास सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं तो शायद आप भी अमेरिका और रूस का नाम लेंगे, लेकिन अगर यह कहा जाए कि किस महाद्वीप में सबसे ज्यादा न्यूक्लियर वेपन हैं तो शायद आप सोच में पड़ जाएं. लेकिन दुनिया के इन सबसे खतरनाक हथियारों का जखीरा कहीं और नहीं, बल्कि यूरोप और एशिया के हिस्सों में है. आइए विस्तार से समझें कि कि महाद्वीप के पास तबाही का कितना सामान है.
कौन है परमाणु शक्ति का केंद्र?
दुनिया में अगर परमाणु हथियारों की संख्या पर नजर घुमाएं तो सारा खेल सिर्फ दो देशों के इर्द-गिर्द घूमता नजर आता है, और ये देश हैं अमेरिका और रूस. आपको भी इस बात को जानकर हैरानी होगी कि दुनिया के कुल परमाणु हथियारों का करीब 86% से 90% हिस्सा इन दोनों देशों के पास है. चूंकि रूस का बहुत बड़ा हिस्सा यूरोप में आता है, इसलिए यूरोप इस मामले में सबसे आगे है.
यूरोप का पलड़ा भारी
यूरोप को आमतौर पर खूबसूरती और शांति के लिए जाना जाता है, लेकिन सैन्य ताकत के मामले में यह सबसे संवेदनशील इलाका है. ताजा आंकड़ों की मानें तो दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु हथियारों का जखीरा इसी महाद्वीप की जमीन पर टिका है. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह रूस है, जो कि दो महाद्वीपों तक फैला हुआ है, लेकिन उसके हथियारों का बड़ा हिस्सा यूरोप में है, इसलिए यह ज्यादा ताकतवर है.
