ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया को एक ऐसे हथियार से रूबरू कराया है जिसने आधुनिक युद्ध के नियमों को बदल दिया है. ईरान की सेज्जिल-2 मिसाइल, जिसे अपनी अनूठी चाल के कारण ‘डांसिंग मिसाइल’ कहा जा रहा है, अब वैश्विक चर्चा का केंद्र है. यह मिसाइल न केवल अपनी रफ्तार के लिए जानी जाती है, बल्कि इसकी हवा में दिशा बदलने की क्षमता ने अमेरिका और इजरायल के सबसे घातक एयर डिफेंस सिस्टम को भी चुनौती दे दी है. आइए जानें कि क्या सेज्जिल-2 मिसाइल परमाणु बम भी ले जा सकती है कि नहीं.
युद्ध का नया चेहरा और डांसिंग मिसाइल
ईरान ने हालिया संघर्षों में अपनी सबसे घातक मिसाइल ‘सेज्जिल-2’ का उपयोग करके पूरी दुनिया को चौंका दिया है. इसे डांसिंग मिसाइल इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह अपने अंतिम चरण में एक सीधी रेखा में चलने के बजाय हवा में कलाबाजियां खाते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ती है. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि दुश्मन के रडार और इंटरसेप्टर मिसाइलें इसके सटीक रास्ते का अंदाजा नहीं लगा पाते हैं. जब तक डिफेंस सिस्टम इसे ट्रैक करता है, तब तक यह अपना काम कर चुकी होती है.

तकनीक जो बनाती है इसे बेजोड़
सेज्जिल-2 ईरान की स्वदेशी तकनीक का एक बेहतरीन नमूना है. यह दो चरणों वाली मिसाइल है जिसमें सॉलिड-फ्यूल यानी ठोस ईंधन का उपयोग किया जाता है. लिक्विड फ्यूल वाली मिसाइलों की तुलना में इसे लॉन्च करना बहुत आसान और तेज है. ठोस ईंधन की वजह से इसे घंटों तक तैयार रखने की जरूरत नहीं पड़ती और इसे बेहद कम समय में मोबाइल लॉन्चर से दागा जा सकता है. यही कारण है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां भी इसके लॉन्च होने का पहले से सटीक पता लगाने में विफल रही हैं.
मारक क्षमता और विशाल रेंज
अगर हम इसकी मारक क्षमता की बात करें, तो यह मिसाइल लगभग 2000 किलोमीटर तक वार कर सकती है. इस रेंज का मतलब है कि तेहरान में बैठकर ईरान बड़ी आसानी से पूरे इजरायल, खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों और यहां तक कि दक्षिण-पूर्वी यूरोप के कुछ हिस्सों को निशाना बना सकता है. इसकी लंबाई करीब 18 मीटर और वजन लगभग 23,600 किलोग्राम है. यह अपने साथ 700 से 1000 किलोग्राम तक का विस्फोटक ले जाने में सक्षम है, जो किसी भी शहर को तबाह करने के लिए काफी है.
क्या यह परमाणु बम ले जा सकती है?
सबसे बड़ा सवाल जो है, वह है इसकी परमाणु क्षमता. तकनीकी रूप से सेज्जिल-2 का डिजाइन ऐसा है कि इसके वॉरहेड सेक्शन में पारंपरिक विस्फोटकों की जगह परमाणु हथियार फिट किया जा सकता है. हालांकि ईरान ने आधिकारिक तौर पर परमाणु हथियार बनाने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस मिसाइल की पेलोड क्षमता और सटीकता इसे एक आदर्श न्यूक्लियर डिलीवरी सिस्टम बनाती है. अगर ईरान परमाणु क्षमता हासिल कर लेता है, तो सेज्जिल-2 उसका सबसे प्रमुख हथियार होगा.
एयर डिफेंस सिस्टम क्यों हो रहे फेल?
इजरायल का आयरन डोम, अमेरिका का पैट्रियट और थाड (THAAD) दुनिया के बेहतरीन डिफेंस सिस्टम माने जाते हैं, लेकिन डांसिंग मिसाइल के सामने ये भी संघर्ष करते दिख रहे हैं. इसका कारण मिसाइल की टर्मिनल फेज में मैन्युवरेबिलिटी यानी दिशा बदलने की शक्ति है. आयरन डोम जैसी प्रणालियां मिसाइल के Trajectory की गणना करके उसे हवा में नष्ट करती हैं. मगर जब मिसाइल हवा में नाचने या अनिश्चित तरीके से घूमने लगती है, तो कंप्यूटर के लिए उसका इंटरसेप्शन पॉइंट तय करना असंभव हो जाता है.
ईरान की आत्मनिर्भरता का प्रतीक
सेज्जिल-2 का विकास ईरान के मिसाइल कार्यक्रम की एक बड़ी सफलता है. यह मिसाइल पूरी तरह से ईरान में विकसित की गई है, जिससे विदेशी प्रतिबंधों का इस पर कोई खास असर नहीं पड़ा है. ईरान ने दशकों से चल रहे आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद अपने रॉकेट प्रोपल्शन और नेविगेशन सिस्टम को इतना उन्नत कर लिया है कि वह अब रूस और चीन जैसी महाशक्तियों की कतार में खड़ा दिख रहा है. यह मिसाइल अब खाड़ी क्षेत्र में शक्ति संतुलन को ईरान के पक्ष में झुका रही है.
