Old Monk Rum Fssai Action: भारत की सबसे पसंदीदा और लोकप्रिय रम ओल्ड मॉन्क इन दिनों सरकारी नियामक संस्था FSSAI की कड़ी कार्रवाई और अपने ऐतिहासिक अतीत के कारण जबरदस्त चर्चा में है. जहां एक तरफ खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने पर इसके कुछ खास वेरिएंट्स की बिक्री पर पाबंदी लगाई गई है, वहीं दूसरी तरफ इसका इतिहास भारत के सबसे काले पन्नों यानी जलियांवाला बाग हत्याकांड से जुड़ा हुआ है. 170 साल पहले हिमाचल की पहाड़ियों में शुरू हुई एक छोटी सी शराब भट्टी से लेकर दुनिया भर में पहचान बनाने और हालिया रेगुलेटरी एक्शन तक, ओल्ड मॉन्क की कहानी काफी दिलचस्प और चौंकाने वाली है.
ईस्ट इंडिया कंपनी का दौर और कसौली में पहली ब्रुअरी
बात 19वीं सदी के मध्य की है, जब भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी का राज था और ब्रिटिश सेना का तेजी से विस्तार हो रहा था. उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ठंडे पहाड़ी इलाकों में सैन्य छावनियां बनाई जा रही थीं. ब्रिटिश सैनिकों और अधिकारियों के लिए शराब और बियर सीधे इंग्लैंड से समुद्री जहाजों द्वारा मंगवाई जाती थी. इस लंबी आपूर्ति प्रक्रिया को आसान और सस्ता बनाने का मौका एक शिक्षित अंग्रेज एडवर्ड डायर ने पहचाना. कसौली के ठंडे मौसम और प्राकृतिक पानी के स्रोतों को देखते हुए उसने ईस्ट इंडिया कंपनी से मंजूरी ली. एडवर्ड डायर इंग्लैंड जाकर मशीनें और इंजीनियर लाया और साल 1855 में कसौली में भारत की पहली ब्रुअरी स्थापित की.

जलियांवाला बाग के खलनायक जनरल डायर से सीधा कनेक्शन
कसौली में ब्रुअरी स्थापित करने वाले इसी एडवर्ड डायर का एक बेटा था रेजीनॉल्ड डायर. बड़ा होकर यह अंग्रेजी सेना में ब्रिगेडियर जनरल बना. यह वही जनरल डायर था जिसने 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में निहत्थे भारतीयों पर अंधाधुंध गोलियां चलाने का हुक्म दिया था. इस भयानक नरसंहार ने भारतीय इतिहास में अंग्रेजों के क्रूर चेहरे को बेनकाब कर दिया. जिस ब्रुअरी की नींव 1855 में एडवर्ड डायर ने रखी थी, उसी फैक्ट्री से निकलने वाले राजस्व और कारोबार के दम पर डायर परिवार का प्रभाव बढ़ा, जो बाद में जलियांवाला बाग के उस काले अध्याय से हमेशा के लिए जुड़ गया.
