धमतरी/ धर्मनगरी धमतरी में परम पूज्य प्रवर्तनी कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका निपूर्णा श्रीजी महाराज साहेब की सुशिष्या, प्रवचन प्रवीणा परम पूज्य स्नेहयशा श्रीजी महाराज साहेब की अंतेवासिनी परम पूज्य रत्ननिधि श्रीजी महाराज साहेब आदि ठाणा-4 का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। 28 जुलाई से प्रारंभ होने वाले चातुर्मास के अवसर पर शहर में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण देखने को मिला।
मंगल प्रवेश के दौरान शहर के विभिन्न स्थानों पर समाजजनों एवं नगरवासियों ने साध्वी भगवंतों का पुष्पवर्षा और मंगल कलश के साथ स्वागत किया। शोभायात्रा में महिलाओं ने मंगल कलश धारण किए, जबकि श्रद्धालु जैन धर्म के ध्वज लेकर जिनशासन की जय-जयकार करते हुए शामिल हुए। श्री पार्श्वनाथ जिनालय पहुंचकर गुरु भगवंतों ने भगवान एवं दादा गुरुदेव के दर्शन-वंदन किए। इसके बाद प्रवचन हॉल में चातुर्मास प्रवेश समारोह धर्मसभा के रूप में आयोजित हुआ, जहां महिला मंडलों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य रत्ननिधि श्रीजी महाराज साहेब ने कहा कि चातुर्मास केवल नगर प्रवेश का अवसर नहीं, बल्कि आत्मजागृति और आत्मचिंतन का पर्व है। उन्होंने कहा कि यह चार माह का समय धर्म आराधना, साधना और आत्मविकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। साधु-साध्वी भी इसी अवधि में एक स्थान पर रहकर आध्यात्मिक साधना करते हैं और समाज को जिनवाणी का अमृत प्रदान करते हैं।
उन्होंने अपने जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2010 में धमतरी से कैवल्यधाम छहरीपाली पदयात्रा के दौरान उन्हें गुरुवर्या स्नेहयशा श्रीजी महाराज साहेब का सानिध्य प्राप्त हुआ था। उसी समय उन्होंने संयम जीवन अपनाने का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि इस प्रेरणा में धमतरी संघ का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि चातुर्मास पानी और वाणी का काल है। जिस प्रकार वर्षा का जल धरती को उर्वर बनाता है, उसी प्रकार जिनवाणी आत्मा को निर्मल और जागृत करती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि 120 दिनों के इस चातुर्मास में धर्मश्रवण, आत्मचिंतन और संयम के माध्यम से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करें।
कार्यक्रम के दौरान गुरु भगवंतों के सांसारिक माता-पिता एवं परिजन भी उपस्थित रहे, जिनका श्रीसंघ एवं चातुर्मास व्यवस्था समिति की ओर से सम्मान किया गया। समारोह में विजय गोलछा, जीवन लोढ़ा, धरमचंद पारख, विरेंद्र गोलछा, अजय बरडिया, लूणकरण गोलछा, लक्ष्मीलाल लूनिया, सुरेश बच्छावत, निलेश पारख, अमित लोढ़ा सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। इसके अलावा राजनांदगांव, दुर्ग, नयापारा राजिम, दल्लीराजहरा, नगरी, बालोद, डौंडी लोहरा और भिवंडी सहित विभिन्न शहरों से भी श्रद्धालु चातुर्मास प्रवेश के साक्षी बने।
