इंटरनेट पर कोई Block की गई Website खोलनी हो किसी Online Game का Ping सुधारना हो या फिर पब्लिक Wi-Fi पर खुद को सेफ रखना हो हम तुरंत Play Store और App Store पर जाकर Free VPN सर्च करते हैं. App Install करके तुरंत Connect कर लेते हैं VPN चालू कर लेते हैं. हमें लगता है कि अब हमारी पहचान पूरी तरह छुप चुकी है और हम डिजिटल दुनिया में एकदम हैं.
लेकिन कहावत है कि अगर कोई सर्विस आपको बिल्कुल फ्री में मिल रही है तो प्रोडक्ट वह सर्विस नहीं बल्कि आप खुद हैं. हाई-स्पीड सर्वर मेंटेन करना, भारी-भरकम इंटरनेट बैंडविड्थ खरीदना और इंजीनियरों की बड़ी टीम संभालना कोई बच्चों का खेल नहीं है इसमें हर महीने लाखों रुपये का खर्च आता है. तो फिर सोचने वाली बात यह है कि यह फ्री VPN कंपनियां अपनी जेब से पैसा लगाकर आपको फ्री में प्राइवेसी क्यों दे रही हैं? कहीं चुपके से यह आपका डेटा तो नहीं चुरा रहीं.

बेचा जा सकता है आपका डेटा
Play Store पर मौजूद लगभग हर फ्री VPN ऐप के बैनर पर बड़े-बड़े अक्षरों में स्ट्रिक्ट नो-लॉग्स पॉलिसी लिखा होता है. इसका मतलब यह होता है कि वे आपका कोई भी डेटा रिकॉर्ड नहीं करते. लेकिन जब Cyber Security एक्सपर्ट्स इन Apps की Privacu Policy चेक करते हैं. तो हकीकत सामने आती है, ज्यादातर फ्री Apps आपकी हर डिजिटल हरकत पर पैनी नजर रखती हैं. आप कौन सी Websites देख रहे हैं, फोन में कौन सी A[pps कितने समय तक इस्तेमाल करते हैं.
आपकी Location और Device का यूनिक आईडी क्या है सब कुछ बैकएंड में लॉग होता रहता है. इस पूरे डेटा को बंडल बनाकर थर्ड-पार्टी डेटा ब्रोकर्स, विज्ञापन कंपनियों और मार्केटिंग एजेंसियों को ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है. यानी Privacy बचाने के जिस मकसद से आपने VPN ऑन किया था उसी VPN ने आपकी प्राइवेसी से खिलवाड़ कर दिया. कई बार तो कमजोर सर्वर होने के चलते यह प्राइवेट जानकारियां Dark Web पर भी लीक हो जाती हैं.

कैसे रह सकते हैं सेफ?
फ्री VPN अगर अनसेफ है तो क्या इसका मतलब यह है कि Internet पर VPN का इस्तेमाल करना ही छोड़ देना चाहिए? बिल्कुल नहीं बस थोड़ी सी सतर्कता बरतने की जरूरत है. सबसे पहला नियम कि किसी भी अनजान डेवलपर ले फ्री VPN ऐप को फोन में कभी जगह न दें. कोई भी ऐप इंस्टॉल करते वक्त उसकी परमिशन जरूर चेक करें. एक VPN टूल को आपके कॉन्टैक्ट्स, गैलरी, कैमरा या स्टोरेज की एक्सेस क्यों चाहिए?
अगर ऐसी गैर-जरूरी Permissions मांगी जा रही हों तो फौरन App को अनइंस्टॉल कर दें. अगर आपको कभी-कभार किसी जरूरी काम के लिए VPN चाहिए ही तो हमेशा उन भरोसेमंद कंपनियों के मॉडल चुनें जो ओपन-सोर्स हैं और जिनका इंडिपेंडेंट सिक्योरिटी ऑडिट हो चुका है जैसे कि प्रोटॉन वीपीएन. यह कंपनियां अपने पेड सब्सक्राइबर्स से कमाई करती हैं इसलिए फ्री यूजर्स के डेटा का सौदा नहीं करतीं.
