मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में महानदी भवन में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगी है. कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा, सिनेमा और पूर्व अग्निवीरों से जुड़े तीन अहम फैसले लिए गए.
वहीं सरकार ने फिल्म हनुमान अंश को छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री करने के निर्णय के बाद SGST की राशि सिनेमाघरों से वसूलने के निर्देश दिए हैं . कैबिनेट बैठक के हुए निर्णयों की जानकारी डिप्टी सीएम अरुण साव ने दी है. इन फैसलों का सबसे ज्यादा असर सरकारी कॉलेजों में पढ़ाने वाले अतिथि व्याख्याताओं और पुलिस-वन-जेल विभाग में भर्ती की तैयारी कर रहे पूर्व अग्निवीरों पर पड़ेगा.

अग्निवीरों को आरक्षण देने का फैसला
छत्तीसगढ़ में मत्रिपरिषद ने पूर्व ‘अग्निवीरों’ को पुलिस विभाग में आरक्षक, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वनरक्षक तथा जेल विभाग में जेल प्रहरी के पदों पर आरक्षण का लाभ देने का फैसला किया है. अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को यहां आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए.
उन्होंने बताया कि पूर्व अग्निवीर सैनिकों को राज्य की सिविल सेवाओं के तृतीय श्रेणी पदों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है. इसके तहत पुलिस विभाग में आरक्षक, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वनरक्षक तथा जेल विभाग में जेल प्रहरी के पदों पर पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण का लाभ मिलेगा.
छत्तीसगढ़ लोक सेवा पूर्व अग्निवीर सैनिक भर्ती नियम बना
अधिकारियों ने बताया कि अब इस आरक्षण को लागू करने के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा पूर्व अग्निवीर सैनिक भर्ती नियम, 2026 बनाया गया है, जिसका मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन किया गया है. इन नियमों में नियुक्ति एवं सेवा शर्तें, भर्ती के मापदंड, आरक्षण और चयन प्रक्रिया निर्धारित की गई है.

अधिकारियों ने बताया कि मंत्रिपरिषद द्वारा प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में लागू अतिथि व्याख्याता नीति-2024 में प्रशासकीय अनुमोदन के बाद जारी संशोधित नीति-2026 का पालन किया गया. संशोधित नीति में पूर्व की व्यवस्था को और अधिक स्पष्ट करते हुए यह प्रावधान किया गया है कि मेरिट सूची में एक ही श्रेणी के दो अभ्यर्थियों के अंक समान होने की स्थिति में छत्तीसगढ़ के मूल निवासी अभ्यर्थी को वरीयता दी जाएगी.
साथ ही, अनुभव के लिए निर्धारित अधिकतम 30 अंकों के अंतर्गत अब शासकीय महाविद्यालय के साथ राजकीय विश्वविद्यालय में एक शैक्षणिक सत्र में न्यूनतम पांच माह अध्यापन कार्य पूर्ण करने पर पांच अंक दिए जाने का प्रावधान किया गया है.
