धमतरी/ शहर के सोरिद वार्ड में रविवार शाम नाले में गिरे 7 वर्षीय मासूम लक्ष्य साहू की तलाश के लिए करीब 24 घंटे तक चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन सोमवार शाम दुखद अंत के साथ पूरा हुआ। भर्रीपारा सोरिद निवासी लक्ष्य, पिता गौतम साहू, खेलते समय नाले में गिर गया था। लगातार तलाश के बाद शाम करीब 5:30 बजे बच्चा उसी पुल के नीचे चौथे नंबर के पाइप में फंसा मिला। उसे बाहर निकालकर 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
खेलते समय नाले में गिरा था मासूम
जानकारी के अनुसार रविवार शाम करीब 5 बजे लक्ष्य साहू खेलते समय स्कूल के पास स्थित नाले में गिर गया। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में वार्डवासी मौके पर पहुंच गए। पुलिस, नगर निगम और बचाव दल ने बच्चे की तलाश शुरू की, लेकिन देर रात तक उसका कोई पता नहीं चल सका।

आक्रोशित वार्डवासियों ने किया चक्काजाम
मासूम के लापता होने से आक्रोशित वार्डवासियों ने रविवार रात नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। लोगों ने बच्चे की तलाश के लिए पुल तोड़ने की मांग उठाई। इसके बाद रात में ही रेस्क्यू अभियान चलाया गया। पुल के एक हिस्से को तोड़ा गया, लेकिन बच्चे का पता नहीं चल पाया। स्थानीय गोताखोरों की टीम ने भी पानी में उतरकर तलाश की, मगर सफलता नहीं मिली।
सुबह फिर शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
सोमवार सुबह करीब 11 बजे दोबारा रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। बच्चे की तलाश में पाइप और पुल के हिस्सों को लगातार तोड़ा गया। इस दौरान एनडीआरएफ टीम के पहुंचने की भी जानकारी सामने आई। स्थानीय वार्डवासी भी बचाव कार्य में जुटे रहे। पार्षद विशु देवांगन मौके पर मौजूद रहे और पूरे अभियान की निगरानी करते रहे।
करीब 5:30 बजे चौथे नंबर के पाइप में बच्चे के फंसे होने का पता चला। मासूम को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। शव को 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
करीब 24 घंटे तक बेटे के सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए बैठे परिवार को जैसे ही बच्चे के नहीं बचने की खबर मिली, माहौल गमगीन हो गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। महापौर रामू रोहरा भी रेस्क्यू अभियान के दौरान लगातार घटनाक्रम की जानकारी लेते रहे।

खुले नाले की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इस हादसे के बाद नाले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल के पास स्थित खुले नाले के आसपास पर्याप्त सुरक्षा घेरा और चेतावनी बोर्ड नहीं थे। बारिश के दौरान तेज बहाव वाले नाले के आसपास सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए, यह भी बड़ा सवाल है।
वार्डवासियों का कहना है कि यदि समय रहते नाले के आसपास सुरक्षा व्यवस्था की गई होती तो शायद इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। अब इस दर्दनाक हादसे के बाद जिम्मेदार विभागों को सबक लेते हुए शहर के खुले नालों और पुल-पुलियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की जरूरत है।
मासूम लक्ष्य की मौत ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है—खुले और खतरनाक नालों के आसपास सुरक्षा इंतजामों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
