धमतरी: चैत्र नवरात्र के अवसर पर धीवर समाज में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। शनिवार को समाज के करीब 200 महिला, पुरुष और बच्चे चार बसों में सवार होकर तुरतुरिया धाम के दर्शन के लिए रवाना हुए। यह यात्रा दानीटोला स्थित मां शीतला मंदिर परिसर से शुरू हुई, जहां महापौर रामू रोहरा ने धर्म ध्वजा दिखाकर तीर्थयात्रियों को विदा किया।
सुबह करीब 9:30 बजे महापौर मंदिर पहुंचे और मां शीतला की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने समाजजनों को यात्रा के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि धीवर समाज की एकता और सामूहिक परंपराएं धमतरी शहर के लिए प्रेरणादायक हैं। समाज के लोग हर वर्ष नवरात्र के दौरान सामूहिक तीर्थयात्रा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद जगबेड़ा, संरक्षक परमेश्वर फुटान सहित कई प्रमुख सदस्य और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

तुरतुरिया धाम का धार्मिक महत्व
समाज के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र नाग ने बताया कि तुरतुरिया महर्षि वाल्मीकि के आश्रम और भगवान श्रीराम के पुत्र लव-कुश की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि माता सीता ने अपने वनवास का समय यहीं बिताया था।
यह स्थान सुरसुरी गंगा नदी के तट पर स्थित है, जहां चट्टानों से गिरते जलप्रपात की ‘तुर-तुर’ ध्वनि इसे विशेष बनाती है। यहां प्राकृतिक गोमुख, जलकुंड और प्राचीन शिव मंदिरों के अवशेष भी मौजूद हैं, जो 8वीं-9वीं शताब्दी के माने जाते हैं।
पर्यटन और प्रकृति का संगम
तुरतुरिया धाम घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है तथा बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य के पास स्थित होने के कारण यह धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य का भी आकर्षण केंद्र है।
