दुनिया का सबसे खुशहाल देश
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फिनलैंड ने इस साल 10 में से 7.764 की शानदार रेटिंग हासिल की है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले बेहतर है. विशेषज्ञों का मानना है कि वहां की बेहतरीन सामाजिक सुरक्षा, भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और व्यक्तिगत आजादी लोगों की संतुष्टि का मुख्य कारण है.
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फिनलैंड के बाद इस सूची में आइसलैंड दूसरे और डेनमार्क तीसरे स्थान पर है. टॉप-10 की सूची में स्वीडन, नॉर्वे और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों का दबदबा बरकरार है. इस बार कोस्टा रिका चौथे स्थान पर रहकर सबको चौंकाने में कामयाब रहा है.
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भारत के लिए यह रिपोर्ट मिली-जुली प्रतिक्रिया लेकर आई है. वैश्विक खुशहाली सूचकांक में भारत 116वें स्थान पर रहा है. हालांकि यह रैंकिंग काफी नीचे है, लेकिन राहत की बात यह है कि भारत की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है. साल 2024 में भारत 126वें और 2025 में 118वें नंबर पर था.
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रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बुजुर्गों के बीच जीवन संतुष्टि के स्तर में बढ़ोतरी देखी गई है, जो रैंकिंग में सुधार का एक बड़ा कारण बना है. फिर भी, दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के बावजूद खुशहाली के मामले में भारत अभी बहुत पीछे है.
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इस रिपोर्ट का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि आर्थिक तंगहाली और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा पाकिस्तान खुशहाली के मामले में भारत से आगे है. पाकिस्तान को इस सूची में 104वां स्थान मिला है.
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वहीं, युद्ध के हालातों का सामना कर रहे इजरायल ने टॉप-10 में अपनी जगह बनाई है और वह 8वें नंबर पर काबिज है. ईरान भी 97वें पायदान के साथ भारत से बेहतर स्थिति में है. यह आंकड़े बताते हैं कि खुशहाली मापने के पैमाने जैसे सामाजिक सहयोग और व्यक्तिगत स्वतंत्रता, केवल जीडीपी के आंकड़ों पर निर्भर नहीं करते हैं.
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एक बड़ा बदलाव यह देखा गया है कि कोई भी प्रमुख अंग्रेजी भाषी देश शीर्ष 10 में जगह नहीं बना पाया है. अमेरिका इस बार फिसलकर 23वें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि यूके 29वें और कनाडा 25वें नंबर पर है. ऑस्ट्रेलिया 15वें पायदान पर रहा.
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वहीं दूसरी ओर, दुनिया के सबसे दुखी देशों की बात करें तो गरीबी और गृहयुद्ध झेल रहे अफगानिस्तान और सिएरा लियोन सबसे निचले पायदान पर हैं. यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद दुनिया के कई हिस्सों में लोगों ने अपने जीवन के मूल्यांकन में सुधार दर्ज किया है.
