Social Media: दुनियाभर में तेजी से बढ़ते सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर पहले भी कई सवाल उठते रहे हैं लेकिन World Happiness Report 2026 ने अब इस चिंता को और गंभीर बना दिया है. इस रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों और किशोरों में सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल उनकी मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाल रहा है. इससे चिंता, अवसाद और जीवन से संतुष्टि में कमी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं.
ज्यादा समय ऑनलाइन बिताना बन रहा खतरा
रिपोर्ट बताती है कि पिछले कुछ वर्षों में किशोरों का स्क्रीन टाइम काफी बढ़ा है और इसी के साथ उनकी मानसिक सेहत में गिरावट भी देखी गई है. खासतौर पर वे बच्चे जो दिन में 5 घंटे या उससे ज्यादा समय सोशल मिडिया पर बिताते हैं उनमें तनाव और डिप्रेशन के लक्षण ज्यादा पाए गए हैं. यह भी सामने आया है कि जिन बच्चे सोशल मीडिया का सीमित इस्तेमाल करते हैं उनकी तुलना में ज्यादा समय बिताने वाले बच्चों में नकारात्मक प्रभाव कई गुना अधिक होता है.
किन प्लेटफॉर्म्स को माना गया सोशल मीडिया
रिसर्च में सोशल मीडिया का मतलब उन सभी प्लेटफॉर्म्स से है जहां यूजर प्रोफाइल, कंटेंट शेयरिंग और इंटरैक्शन होता है. इसमें Facebook, Instagram, Snapchat, TikTok, YouTube और X जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं.
2010 के बाद से बिगड़नी शुरू हुई स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, युवाओं की खुशहाली में गिरावट की शुरुआत 2010 के आसपास से देखी गई जब स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा. यह वही समय था जब बच्चों का सामाजिक जीवन धीरे-धीरे ऑफलाइन से ऑनलाइन की तरफ शिफ्ट होने लगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव ने बच्चों के व्यवहार, सोच और मानसिक स्थिति पर बड़ा असर डाला है.

लड़कियों पर ज्यादा असर
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि किशोर लड़कियां इस समस्या से ज्यादा प्रभावित हो रही हैं. उनमें सोशल मीडिया के अधिक इस्तेमाल से आत्मविश्वास में कमी, शरीर को लेकर असंतोष, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती हैं. एल्गोरिदम आधारित कंटेंट, इन्फ्लुएंसर कल्चर और दूसरों से लगातार तुलना करने की आदत बच्चों को मानसिक रूप से कमजोर बना सकती है.
सिर्फ समय नहीं, इस्तेमाल का तरीका भी अहम
रिपोर्ट यह भी बताती है कि समस्या केवल समय की नहीं है बल्कि इस बात की भी है कि सोशल मीडिया का उपयोग कैसे किया जा रहा है. बिना सोचे-समझे लगातार वीडियो और फोटो स्क्रॉल करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए ज्यादा हानिकारक पाया गया है. वहीं, दोस्तों से बातचीत या सीमित और संतुलित इस्तेमाल का असर उतना नकारात्मक नहीं होता.
ऑनलाइन खतरों से भी बढ़ रहा दबाव
सोशल मीडिया के साथ कई तरह के जोखिम भी जुड़े हुए हैं जैसे साइबर बुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न और आपत्तिजनक कंटेंट. ये सभी चीजें बच्चों के मन पर दबाव डालती हैं और उनकी भावनात्मक स्थिति को प्रभावित करती हैं. रिसर्चर्स का मानना है कि यह समस्या अब सिर्फ कुछ बच्चों तक सीमित नहीं रही बल्कि पूरी एक पीढ़ी की मानसिक सेहत को प्रभावित कर रही है.
