ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वेलबीइंग रिसर्च सेंटर ने ‘वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026’ जारी कर दी है, जिसने दुनिया के 147 देशों की मानसिक और सामाजिक स्थिति का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है. जहां उत्तरी यूरोप के देश अपनी बेहतरीन जीवनशैली और सुरक्षा के कारण मुस्कुरा रहे हैं, वहीं दुनिया के कुछ कोने ऐसे भी हैं, जहां खुश रहना एक सपने जैसा है. इस रिपोर्ट के अनुसार, फिनलैंड ने लगातार 10वीं बार दुनिया के सबसे खुशहाल देश का खिताब अपने नाम किया है, लेकिन इस चमक-धमक वाली लिस्ट के दूसरे छोर पर वो देश खड़े हैं, जो गरीबी, युद्ध और तानाशाही की मार झेल रहे हैं.
फिनलैंड की बादशाहत और कोस्टा रिका की छलांग
खुशहाली के मामले में फिनलैंड एक बार फिर नंबर वन बना हुआ है. इसके बाद आइसलैंड, डेनमार्क, स्वीडन और नॉर्वे जैसे देशों का नंबर आता है, जहां सामाजिक सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सबसे ऊपर रखा जाता है. इस साल की रिपोर्ट में लैटिन अमेरिकी देश कोस्टा रिका ने सबको चौंका दिया है. साल 2023 में 23वें पायदान पर रहने वाला यह देश अब टॉप रैंकिंग में अपनी जगह पक्की कर चुका है. इन देशों की सफलता का राज वहां की बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और सरकार के प्रति जनता का अटूट भरोसा है, जो इन्हें दुनिया का सबसे सुकून भरा स्थान बनाता है.
दुनिया का सबसे दुखी देश
खुशहाली की इस दौड़ में सबसे निचले पायदान यानी 147वें नंबर पर अफगानिस्तान है. भारत का यह पड़ोसी देश लगातार कई वर्षों से दुनिया का सबसे नाखुश देश बना हुआ है. तालिबान शासन के आने के बाद यहां मानवीय अधिकारों का बड़े पैमाने पर हनन हुआ है. गंभीर आर्थिक संकट, गरीबी और भुखमरी ने यहां के आम नागरिकों का जीवन नर्क बना दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में महिलाओं की शिक्षा और आजादी पर लगी पाबंदियों ने यहां की खुशहाली को पूरी तरह खत्म कर दिया है, जिससे यहां हमेशा मातम जैसा माहौल बना रहता है.

अफ्रीकी महाद्वीप के देशों का बुरा हाल
अफगानिस्तान के अलावा अफ्रीकी महाद्वीप के कई देश भी इस लिस्ट में सबसे नीचे हैं. जिम्बाब्वे 144वें पायदान पर है, जहां महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता ने लोगों की कमर तोड़ दी है. इसके अलावा दक्षिण सूडान, तंजानिया और मध्य अफ्रीकी गणराज्य (Central African Republic) भी दुनिया के सबसे दुखी देशों की सूची में शामिल हैं. इन देशों में खुशहाली न होने के पीछे भीषण गरीबी, बेरोजगारी और लगातार चलते गृहयुद्ध जैसे कारण जिम्मेदार हैं. यहां बुनियादी सुविधाओं का इतना अभाव है कि लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं.
खुशहाली छिनने के मुख्य कारण क्या हैं?
वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट के विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश के दुखी होने के पीछे केवल पैसा ही वजह नहीं है. भ्रष्टाचार, असुरक्षा का भाव और न्याय न मिलना लोगों को मानसिक रूप से बीमार बना रहा है. जिन देशों में युद्ध और अस्थिरता है, वहां की जनता भविष्य को लेकर डरी हुई रहती है. बेरोजगारी और बढ़ती महंगाई के कारण युवा वर्ग में हताशा बढ़ रही है. यही वजह है कि जिन देशों में सरकारों ने जनता की खुशहाली को अपनी प्राथमिकता नहीं बनाया, वे देश आज इस वैश्विक इंडेक्स में सबसे नीचे गिरते जा रहे हैं.
