Tech Tips: पूरी दुनिया में टेक्नोलॉजी काफी तेजी से विस्तार कर रही है. आज कल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने लोगों के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है. इसी कड़ी में बता दें कि अक्सर लोगों ने देखा होगा कि टीवी के रिमोट में लाल लाइट जलती है. दरअसल, वो इंफ्रारेड टेक्नोलॉजी होती है. लेकिन सवाल ये है कि आज के वाई-फाई और ब्लूटूथ के जमाने में टीवी के रिमोट में आज भी क्यों इंफ्रारेड टेक्नोलॉजी क्यों इस्तेमाल हो रही है. आइए जानते हैं क्या है वजह.
कैसे काम करती है इंफ्रारेड टेक्नोलॉजी
जानकारी के मुताबिक, इन्फ्रारेड रिमोट एक छोटे LED की मदद से इंसानों को न दिखने वाली रोशनी की तेज पल्स भेजता है. टीवी के सामने लगा IR सेंसर इन सिग्नल्स को पहचानकर उन्हें कमांड में बदल देता है. यही वजह है कि जब आप रिमोट के सामने वाले हिस्से को मोबाइल कैमरे से देखकर कोई बटन दबाते हैं तो कई बार कैमरे में हल्की चमक दिखाई देती है. ये वही इन्फ्रारेड सिग्नल होता है जिसे हमारी आंखें सीधे नहीं देख सकतीं हैं.
Bluetooth और Infrared में क्या होता है अंतर
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Bluetooth का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसके लिए रिमोट का टीवी की तरफ सीधा होना जरूरी नहीं होता. यानी अगर टीवी सामने नहीं भी है या बीच में कोई रुकावट है तब भी रिमोट आसानी से काम कर सकता है.

वहीं Infrared के लिए रिमोट और टीवी के बीच सीधी लाइन ऑफ साइट (Line of Sight) जरूरी होती है. हालांकि IR कम बैटरी खर्च करता है लेकिन आज के दौर में ये टेक्नोलॉजी उतनी जरूरी नहीं रह गई है क्योंकि ज्यादातर स्मार्ट रिमोट Bluetooth का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, आज भी लोगों के घरों में इंफ्रारेड वाले रिमोट मौजूद हैं जो बिना किसी दिक्कत के काम कर रहे हैं.
अभी तक क्यों नहीं हटा IR
बता दें कि आज के ज्यादातर स्मार्ट टीवी Bluetooth रिमोट के साथ आते हैं जिनमें वॉयस कंट्रोल, एयर जेस्चर और कई स्मार्ट फीचर्स मिलते हैं. इसके बावजूद लगभग हर रिमोट में इन्फ्रारेड ट्रांसमीटर भी मौजूद रहता है.
इसकी सबसे बड़ी वजह इसकी कम लागत और बेहतरीन Compatibility है. दशकों से टीवी, साउंडबार और दसरे होम एंटरटेनमेंट डिवाइस IR टेक्नोलॉजी पर बेस्ड रहे हैं. ऐसे में पूरी व्यवस्था बदलना न तो आसान है और न ही जरूरी. इसलिए कंपनियां Bluetooth और Infrared दोनों तकनीकों को एक साथ इस्तेमाल करती हैं.
