मोबाइल नेटवर्क की दुनिया में अब 5G के बाद अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी यानी 6G की तैयारी तेज हो रही है. आने वाले समय में इसका इस्तेमाल सिर्फ तेज इंटरनेट चलाने तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि AI, ऑनलाइन हेल्थकेयर, पढ़ाई और रियल-टाइम डिजिटल सेवाओं में भी इसकी जरूरी भूमिका हो सकती है.
इसी दिशा में Reliance Jio ने भारत में 6G को लेकर अपनी योजनाएं सामने रखी हैं. इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 में कंपनी ने कहा कि वैश्विक मानक तय होने के बाद भारत उन शुरुआती देशों में शामिल हो सकता है, जहां कमर्शियल 6G सेवाएं शुरू होंगी. कंपनी ने अपने नए नेटवर्क से जुड़ी तकनीक का प्रदर्शन भी किया है.
6G में 5G से कितनी ज्यादा क्षमता मिलेगी?
Jio के मुताबिक, 6G नेटवर्क मौजूदा 5G नेटवर्क के मुकाबले पांच गुना तक ज्यादा क्षमता दे सकते हैं. कंपनी का यह भी दावा है कि इसमें नेटवर्क लेटेंसी करीब 10 गुना तक कम हो सकती है. कम लेटेंसी का मतलब है कि किसी कमांड या रिक्वेस्ट पर नेटवर्क तेजी से प्रतिक्रिया दे सकेगा.

इस तरह की कनेक्टिविटी से AI सेवाओं को रियल टाइम में काम करने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा, होलोग्राफिक वीडियो, हेल्थकेयर, शिक्षा और दूसरी डिजिटल सेवाओं के लिए भी ज्यादा बैंडविड्थ उपलब्ध हो सकती है, हालांकि 6G की कमर्शियल शुरुआत के लिए वैश्विक मानकों का अंतिम रूप से तय होना जरूरी है, जिसे 2030 के आसपास का लक्ष्य बताया गया है.
Jio ने दिखाई Giga MIMO Radio तकनीक
IMC 2026 में Jio ने अपना Giga MIMO Radio पेश किया. कंपनी का दावा है कि यह भारत का पहला Giga MIMO Radio है. इसके साथ एक ऐसी कॉमन बेसबैंड यूनिट भी दिखाई गई, जो 5G और 6G दोनों नेटवर्क को सपोर्ट कर सकती है. Jio ने बताया कि उसने 8,000 से ज्यादा पेटेंट फाइल किए हैं, जिनमें सैकड़ों 6G से जुड़े हैं. कंपनी के मुताबिक, वैश्विक नेटवर्क मानकों को विकसित करने की प्रक्रिया में भी उसने 934 से ज्यादा योगदान दिए हैं.

किसानों, डॉक्टरों और छात्रों को कैसे मिलेगी मदद?
Jio का मानना है कि तेज कनेक्टिविटी और कम लेटेंसी से AI आधारित सेवाएं ज्यादा तेजी से जवाब दे सकेंगी. कंपनी ने किसानों, डॉक्टरों और छात्रों के लिए ऐसे संभावित इस्तेमाल भी दिखाए. इसके साथ वह AI-native और quantum-safe नेटवर्क पर काम कर रही है, जिनका उद्देश्य नेटवर्क की क्षमता और सुरक्षा को बेहतर बनाना है.
सैटेलाइट कनेक्टिविटी की भी तैयारी
Jio ने IMC 2026 में Sovereign Satellite Connectivity योजना भी पेश की. इसके तहत कंपनी करीब 1,600 लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट और देशभर में 23 ग्राउंड स्टेशन वाले नेटवर्क की योजना बना रही है. यह पहल कंपनी की अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी से जुड़ी तैयारियों का हिस्सा है.
