भारत में टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम की अगली बड़ी तस्वीर इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में देखने को मिल रही है. नई दिल्ली के यशोभूमि में चल रहे IMC के 10वें संस्करण का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया. 7 से 10 अक्टूबर तक चल रहे इस आयोजन में 6G, AI, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, साइबर सिक्योरिटी और नई पीढ़ी के नेटवर्क से जुड़ी तकनीकों पर खास चर्चा हो रही है. इस बार आयोजन का फोकस नई टेक्नोलॉजी दिखाने के साथ इन्हें बड़े स्तर पर इस्तेमाल में लाने पर भी जोर दिया जा रहा है.
6G पर रहेगी खास नजर
IMC 2026 के दूसरे दिन 6G सबसे बड़े चर्चा के विषयों में शामिल है. कार्यक्रम में 3rd International 6G Symposium भी आयोजित किया जा रहा है. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत में 99 पर्सेंट से ज्यादा गांवों तक 4G पहुंच चुका है, जबकि 99.9 पर्सेंट जिलों में 5G नेटवर्क मौजूद है. उनके मुताबिक अगले चरण में चुनौती लोगों को कनेक्टिविटी का ज्यादा इस्तेमाल कराने की है.
उन्होंने बताया कि करीब दस साल पहले 1GB डेटा की कीमत लगभग 270 रुपये थी, जो अब घटकर करीब 8 रुपये रह गई है. वहीं डेटा इस्तेमाल भी काफी बढ़ा है. अब सरकार का लक्ष्य देशभर में हर ग्राहक तक 100Mbps ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाना है.
AI के साथ Deepfake और Cyber Fraud पर भी फोकस
PM मोदी ने Deepfake और Cyber Fraud को बड़ी चुनौती बताते हुए डिजिटल सुरक्षा के लिए वैश्विक फ्रेमवर्क की जरूरत बताई. उनका कहना था कि टेक्नोलॉजी तभी बड़े स्तर पर काम कर सकती है जब लोगों को अपने डेटा और पैसे की सुरक्षा पर भरोसा हो. AI को लेकर सिंधिया ने कहा कि सरकार, इंडस्ट्री और ITU के बीच मिलकर काम करने और एक ऐसे common minimum programme की जरूरत बताई, जो लोगों को AI के संभावित नुकसान से सुरक्षा दे सके.

टेलीकॉम सेक्टर में बदलाव
केंद्रीय संचार मंत्री सिंधिया ने कहा कि सरकार अब telecom इकोसिस्टम में facilitator और पार्टनर के तौर पर काम कर रही है. नए Telecom Act 2023 के साथ परमिशन को डिजिटल बनाया गया है और spectrum policy में ट्रांसपेरेंसी पर जोर दिया गया है. सरकार करीब 35,000 गांवों में टावर लगाने के लिए 12,000-15,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है.

AI के लिए डेटा सेंटर और सबमरीन केबल जरूरी
ITU के Onoe ने AI के लिए data centres और broadband connectivity में लगातार निवेश की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि AI की पूरी वैल्यू चैन कोई एक देश अकेले तैयार नहीं कर सकता, इसलिए अलग-अलग देशों और इंडस्ट्रीज के बीच सहयोग जरूरी है. जापान के Fuseda ने भी AI के दौर में data centres और submarine cables को जरूरी इंफ्रास्ट्रकचर बताया.
