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क्या देर रात तक रील्स देखना और फोन चलाना बन रहा जल्दी मौत का कारण, जानिए क्या कहता है विज्ञान?

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आज के दौर में सुबह की पहली किरण से लेकर रात के घोर सन्नाटे तक हर किसी के हाथ में सोने से पहले किताब हो या न हो, लेकिन स्मार्टफोन जोंक की तरह चिपका रहता है. बिस्तर पर लेटे-लेटे घंटों रील्स स्क्रॉल करना या फिर फिल्म और वेब सीरीज देखते हुए रात का वक्त गुजार देना दुनिया में तमाम लोगों की आदत बन चुका है. लेकिन क्या आप इस बात से वाकिफ हैं कि जो ये घंटों रील्स चलाकर आप कुछ पल का सुकून तलाश रहे हैं वो आपके शरीर पर कितना भारी पड़ रहा है. सोशल मीडिया पर तो इस बात तक भी चर्चा है कि देर रात तक फोन चलाना जल्दी मौत का कारण बन रहा है. चलिए विज्ञान के चश्मे से जानते हैं कि यह कितना सही है.

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आज के समय में ज्यादातर लोग कामकाजी हैं, ऐसे में उनको काम के वक्त फोन चलाने का मौका कम ही मिलता है. तो वे सोचते हैं कि रात को थोड़ी देर स्क्रीन चालू कर लेते हैं. लेकिन ये थोड़ी देर कब दो-तीन घंटे में तब्दील हो जाते हैं, ये आप जान ही नहीं पाते हैं.
आज के समय में ज्यादातर लोग कामकाजी हैं, ऐसे में उनको काम के वक्त फोन चलाने का मौका कम ही मिलता है. तो वे सोचते हैं कि रात को थोड़ी देर स्क्रीन चालू कर लेते हैं. लेकिन ये थोड़ी देर कब दो-तीन घंटे में तब्दील हो जाते हैं, ये आप जान ही नहीं पाते हैं.
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जब भी आप मोबाइल चालू करते हैं तो उसमें से एक खास किस्म की ब्लू लाइट निकलती है. विज्ञान कहता है कि यह रोशनी हमारे दिमाग के साथ खतरनाक धोखा करती है. रात के वक्त भी इस रोशनी को देखकर कई बार यह भ्रम हो जाता है कि बाहर अभी उजाला है.

जब भी आप मोबाइल चालू करते हैं तो उसमें से एक खास किस्म की ब्लू लाइट निकलती है. विज्ञान कहता है कि यह रोशनी हमारे दिमाग के साथ खतरनाक धोखा करती है. रात के वक्त भी इस रोशनी को देखकर कई बार यह भ्रम हो जाता है कि बाहर अभी उजाला है.
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इसी वजह से शरीर के अंदर मेलाटोनिन नाम का जरूरी हॉर्मोन बनना बेहद कम हो जाता है, जो कि हमारी चैन की नींद के लिए जिम्मेदार होता है. घंटों फोन चलाने का नतीजा यह होता है कि हमारी गहरी और सुकून भरी नींद पूरी तरह से गायब हो जाती है.
इसी वजह से शरीर के अंदर मेलाटोनिन नाम का जरूरी हॉर्मोन बनना बेहद कम हो जाता है, जो कि हमारी चैन की नींद के लिए जिम्मेदार होता है. घंटों फोन चलाने का नतीजा यह होता है कि हमारी गहरी और सुकून भरी नींद पूरी तरह से गायब हो जाती है.
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अब सवाल उठता है कि सोशल मीडिया पर देर रात तक फोन चलाने से जो जल्दी मौत के दावे किए जा रहे हैं, वो कितने सही हैं. हालांकि चिकित्सा जगत की रिसर्च इस बात को पूरी तरह से खारिज कर देती है. देर रात तक स्क्रीन देखते रहने से सीधे मौत तो नहीं होती है, लेकिन फिर भी इसके पीछे खतरा है.
अब सवाल उठता है कि सोशल मीडिया पर देर रात तक फोन चलाने से जो जल्दी मौत के दावे किए जा रहे हैं, वो कितने सही हैं. हालांकि चिकित्सा जगत की रिसर्च इस बात को पूरी तरह से खारिज कर देती है. देर रात तक स्क्रीन देखते रहने से सीधे मौत तो नहीं होती है, लेकिन फिर भी इसके पीछे खतरा है.
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जब आप लगातार कई दिनों या कई महीनों तक अपनी नींद के साथ इसी तरह से खिलवाड़ करते रहते हैं, तो शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है. नींद की यह भयंकर कमी धीरे-धीरे शरीर को जानलेवा बीमारियों का घर बना देती है.
जब आप लगातार कई दिनों या कई महीनों तक अपनी नींद के साथ इसी तरह से खिलवाड़ करते रहते हैं, तो शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है. नींद की यह भयंकर कमी धीरे-धीरे शरीर को जानलेवा बीमारियों का घर बना देती है.
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इस बात को परखने के लिए विज्ञान की दुनिया में मक्खियों पर प्रयोग किया गया. जब मक्खियों को लगातार कई दिनों तक मोबाइल जैसी नीली रोशनी के सामने रखा गया तो देखा गया कि उनके दिमाग की नसें कमजोर हो गई हैं और उनकी उम्र भी काफी कम हो गई है. हालांकि इंसान के ऊपर इसका जानलेवा असर अभी तक साबित नहीं हुआ है, लेकिन डॉक्टर्स का मानना है कि जो आदत छोटे जीव की जिंदगी खराब कर सकती है, वह इंसानों के लिए भी अच्छी नहीं हो सकती है.
इस बात को परखने के लिए विज्ञान की दुनिया में मक्खियों पर प्रयोग किया गया. जब मक्खियों को लगातार कई दिनों तक मोबाइल जैसी नीली रोशनी के सामने रखा गया तो देखा गया कि उनके दिमाग की नसें कमजोर हो गई हैं और उनकी उम्र भी काफी कम हो गई है. हालांकि इंसान के ऊपर इसका जानलेवा असर अभी तक साबित नहीं हुआ है, लेकिन डॉक्टर्स का मानना है कि जो आदत छोटे जीव की जिंदगी खराब कर सकती है, वह इंसानों के लिए भी अच्छी नहीं हो सकती है.
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रोजाना रात में घंटों स्क्रीन देखने से न सिर्फ हमारी नींद अधूरी रह जाती है, बल्कि शरीर में तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं. लंबे समय तक ऐसा चलते रहने से दिल की बीमारियां, हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डाइबिटीज, वजन बढ़ना, और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं होने लगती हैं.
रोजाना रात में घंटों स्क्रीन देखने से न सिर्फ हमारी नींद अधूरी रह जाती है, बल्कि शरीर में तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं. लंबे समय तक ऐसा चलते रहने से दिल की बीमारियां, हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डाइबिटीज, वजन बढ़ना, और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं होने लगती हैं.
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रिसर्च तो यह भी कहते हैं कि सोने से पहले एक घंटे फोन चलाने से अनिद्रा यानि इंसोमनिया बीमारी का खतरा 59% तक बढ़ जाता है और हमारी रात की नींद 24 मिनट कम हो जाती है. इससे बचने के लिए रात को 9 या 10 बजे फोन को नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर में रखें. सबसे बेहतर तो यह है कि सोने से एक घंटे पहले फोन दूर कर दे और कोई अच्छी किताब पढ़ें या लाइट म्यूजिक सुनें.
रिसर्च तो यह भी कहते हैं कि सोने से पहले एक घंटे फोन चलाने से अनिद्रा यानि इंसोमनिया बीमारी का खतरा 59% तक बढ़ जाता है और हमारी रात की नींद 24 मिनट कम हो जाती है. इससे बचने के लिए रात को 9 या 10 बजे फोन को नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर में रखें. सबसे बेहतर तो यह है कि सोने से एक घंटे पहले फोन दूर कर दे और कोई अच्छी किताब पढ़ें या लाइट म्यूजिक सुनें.

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