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जब दुनिया के मिडिल में है नहीं तो क्यों कहते हैं इसे ‘मिडिल ईस्ट’, किसने दिया था ये नाम?

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ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण ‘मिडल ईस्ट’ शब्द आज पूरी दुनिया की जुबान पर है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नक्शे पर जो हिस्सा न दुनिया के बीच में है और न ही पूरी तरह पूर्व में, उसे आखिर ‘मिडल ईस्ट’ क्यों कहा जाता है? यह नाम किसी भौगोलिक सच्चाई से ज्यादा गुलामी के दौर की उस मानसिकता को दर्शाता है, जब दुनिया के नक्शे को केवल लंदन की खिड़की से देखा जाता था. आइए जानते हैं इस नाम के पीछे की असली कहानी क्या है.

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दुनिया के नक्शे पर नजर डालें तो सऊदी अरब, ईरान या इराक जैसे देश न तो मध्य में हैं और न ही पूरी तरह पूर्व में. दरअसल, एक लंबे समय तक दुनिया के बड़े हिस्से पर ब्रिटिश साम्राज्य का राज रहा. इंग्लैंड चूंकि यूरोप में स्थित है, इसलिए अंग्रेजों ने अपनी भौगोलिक स्थिति के आधार पर ही दुनिया को बांटना शुरू किया.
दुनिया के नक्शे पर नजर डालें तो सऊदी अरब, ईरान या इराक जैसे देश न तो मध्य में हैं और न ही पूरी तरह पूर्व में. दरअसल, एक लंबे समय तक दुनिया के बड़े हिस्से पर ब्रिटिश साम्राज्य का राज रहा. इंग्लैंड चूंकि यूरोप में स्थित है, इसलिए अंग्रेजों ने अपनी भौगोलिक स्थिति के आधार पर ही दुनिया को बांटना शुरू किया.
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उनके हिसाब से जो देश यूरोप के पूर्व में थे वे 'ईस्टर्न' कहलाए और जो पश्चिम में थे वे 'वेस्टर्न' देश बन गए. यह पूरी तरह से यूरोप-केंद्रित सोच थी जिसे 'यूरो-सेंट्रिक' नजरिया कहा जाता है. अंग्रेजों ने एशिया को तीन हिस्सों में बांटा था. यूरोप के सबसे करीब वाले एशियाई क्षेत्र (जैसे बाल्कन और तुर्की का इलाका) को उन्होंने 'नियर ईस्ट' यानी निकट पूर्व कहा.
उनके हिसाब से जो देश यूरोप के पूर्व में थे वे ‘ईस्टर्न’ कहलाए और जो पश्चिम में थे वे ‘वेस्टर्न’ देश बन गए. यह पूरी तरह से यूरोप-केंद्रित सोच थी जिसे ‘यूरो-सेंट्रिक’ नजरिया कहा जाता है. अंग्रेजों ने एशिया को तीन हिस्सों में बांटा था. यूरोप के सबसे करीब वाले एशियाई क्षेत्र (जैसे बाल्कन और तुर्की का इलाका) को उन्होंने ‘नियर ईस्ट’ यानी निकट पूर्व कहा.
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वहीं एशिया के सबसे दूर वाले हिस्से, जैसे चीन और जापान को 'फार ईस्ट' यानी सुदूर पूर्व का नाम दिया गया. इन दोनों के बीच जो अरब और खाड़ी का क्षेत्र पड़ता था, उसे सुविधा के लिए 'मिडल ईस्ट' यानी मध्य पूर्व कह दिया गया. यानी यह नाम असली भूगोल पर नहीं, बल्कि लंदन से उनकी दूरी के हिसाब से तय हुआ था.
वहीं एशिया के सबसे दूर वाले हिस्से, जैसे चीन और जापान को ‘फार ईस्ट’ यानी सुदूर पूर्व का नाम दिया गया. इन दोनों के बीच जो अरब और खाड़ी का क्षेत्र पड़ता था, उसे सुविधा के लिए ‘मिडल ईस्ट’ यानी मध्य पूर्व कह दिया गया. यानी यह नाम असली भूगोल पर नहीं, बल्कि लंदन से उनकी दूरी के हिसाब से तय हुआ था.
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हालांकि यह शब्द अंग्रेजों की देन था, लेकिन इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय 1902 में अमेरिकी नौसेना रणनीतिकार अल्फ्रेड थायर महान को जाता है. उन्होंने ब्रिटिश भारत और स्वेज नहर के बीच के इलाके को परिभाषित करने के लिए इस शब्द का औपचारिक इस्तेमाल किया. उस समय ब्रिटिश भारत साम्राज्य का सबसे अहम हिस्सा था और ब्रिटेन के लिए यह इलाका व्यापार और सेना की आवाजाही के लिए बहुत महत्वपूर्ण था.
हालांकि यह शब्द अंग्रेजों की देन था, लेकिन इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय 1902 में अमेरिकी नौसेना रणनीतिकार अल्फ्रेड थायर महान को जाता है. उन्होंने ब्रिटिश भारत और स्वेज नहर के बीच के इलाके को परिभाषित करने के लिए इस शब्द का औपचारिक इस्तेमाल किया. उस समय ब्रिटिश भारत साम्राज्य का सबसे अहम हिस्सा था और ब्रिटेन के लिए यह इलाका व्यापार और सेना की आवाजाही के लिए बहुत महत्वपूर्ण था.
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द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना ने इस शब्द का उपयोग इतना अधिक किया कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो गया. अक्सर लोग 'मिडल ईस्ट' और 'खाड़ी देश' को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इनमें अंतर है. खाड़ी या 'गल्फ' उस जगह को कहते हैं जहां समुद्र का पानी जमीन के अंदर तक घुसा होता है.
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना ने इस शब्द का उपयोग इतना अधिक किया कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो गया. अक्सर लोग ‘मिडल ईस्ट’ और ‘खाड़ी देश’ को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इनमें अंतर है. खाड़ी या ‘गल्फ’ उस जगह को कहते हैं जहां समुद्र का पानी जमीन के अंदर तक घुसा होता है.
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पश्चिमी एशिया के वे देश जिनकी सीमा फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से लगती है, उन्हें खाड़ी देश कहा जाता है. इसमें मुख्य रूप से सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, बहरीन, कतर और ओमान शामिल हैं. यह एक शुद्ध भौगोलिक शब्द है जो समुद्र से जुड़ी उनकी स्थिति को दर्शाता है.
पश्चिमी एशिया के वे देश जिनकी सीमा फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से लगती है, उन्हें खाड़ी देश कहा जाता है. इसमें मुख्य रूप से सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, बहरीन, कतर और ओमान शामिल हैं. यह एक शुद्ध भौगोलिक शब्द है जो समुद्र से जुड़ी उनकी स्थिति को दर्शाता है.
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मिडल ईस्ट के भीतर एक और श्रेणी 'अरब देशों' की है. इसका संबंध किसी खाड़ी या समुद्र से नहीं, बल्कि भाषा और सभ्यता से है. जिन देशों की मुख्य भाषा अरबी है और जिनकी पहचान अरब संस्कृति से जुड़ी है, वे अरब देश कहलाते हैं.
मिडल ईस्ट के भीतर एक और श्रेणी ‘अरब देशों’ की है. इसका संबंध किसी खाड़ी या समुद्र से नहीं, बल्कि भाषा और सभ्यता से है. जिन देशों की मुख्य भाषा अरबी है और जिनकी पहचान अरब संस्कृति से जुड़ी है, वे अरब देश कहलाते हैं.
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इसमें मिस्र (इजिप्ट) जैसे देश भी शामिल हैं जो अफ्रीका महाद्वीप में हैं, लेकिन अरबी संस्कृति के कारण अरब जगत का हिस्सा माने जाते हैं. इस तरह मिडल ईस्ट एक बड़ा राजनीतिक नाम है, जबकि खाड़ी और अरब देश उसके भीतर की सांस्कृतिक और भौगोलिक उप-श्रेणियां हैं.
इसमें मिस्र (इजिप्ट) जैसे देश भी शामिल हैं जो अफ्रीका महाद्वीप में हैं, लेकिन अरबी संस्कृति के कारण अरब जगत का हिस्सा माने जाते हैं. इस तरह मिडल ईस्ट एक बड़ा राजनीतिक नाम है, जबकि खाड़ी और अरब देश उसके भीतर की सांस्कृतिक और भौगोलिक उप-श्रेणियां हैं.

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