Ketan Murder Case Lohagarh Fort: पुणे के पथरीले रास्तों और खूबसूरत वादियों के बीच गर्व से सीना ताने खड़ा लोहागढ़ किला आज एक अजीब सी खामोशी में डूबा हुआ है. सैलानियों और ट्रैकर्स को अपनी प्राकृतिक खूबसूरती से लुभाने वाला यह किला आज खौफनाक मर्डर मिस्ट्री की वजह से चर्चा में आ गया है. रियाल एस्टेट कारोबारी के 26 वर्षीय बेटे केतन अग्रवाल की मौत, जिसे पहले एक आम हादसा समझा गया है, अब वह हत्या की साजिश बनकर सामने आ चुका है. केतन की अपनी ही मंगेतर ने उसे किले की ऊंचाईयों से गहरी खाई में धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई. इस दिल दहला देने वाली वारदात के बीच किले का इतिहास लोगों का ध्यान खींच रहा है.
ऊंचे पहाड़..गहरी खाइयां और लोहे जैसा मजबूत किला
लोहागढ़ का किला भौगोलिक और रणनीतिक रूप से महाराष्ट्र के पुणे जिले में लोनावला के बेहद पास स्थित है. पुणे शहर से करीब 50 किलोमीटर दूर, समुद्रतल से लगभग 1033 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह किला पश्चिमी घाट की गोद में बसा है. मराठी भाषा में इसके नाम का मतलब होता है लोहे जैसा मजबूत. यह नाम इसके ऊंचे पहाड़ों, गहरी खाइयों और अभेद्य बनावट को देखकर सटीक बैठता है. इसके पास में विसापुर किला भी है, जिस वजह से यह इलाका सदियों से सैन्य नजरों में भी संवेदनशील रहा है.
लोहागढ़ किले पर किसका-किसका चला राज?
इस किले की नींव कब रखी गई इसके पुख्ता प्रमाण तो नहीं मिल पाए, लेकिन इतिहासकार इसे कम से कम 2000 साल पुराना बताते हैं. अपने लंबे सफर में इस एतिहासिक किले ने कई बड़े साम्राज्यों का उत्थान और पतन देखा है. लोहागढ़ किले पर समय-समय पर सातवाहन, चालुक्य, राष्ट्रकूट, यादव और मुगलों ने राज किया है. हर शासक ने इसकी मजबूती को देखते हुए इसे अपनी सत्ता का मुख्य केंद्र बनाने की कोशिश की है. इसकी भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां बैठकर पूरे व्यापारिक मार्गों और आस-पास के मैदानी इलाकों पर नजर बनाई जा सकती है.

छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ा इतिहास
लोहागढ़ किले का सबसे गौरवशाली इतिहास और सुनहरा पन्ना शिवाजी महाराज के काल में लिखा गया. शिवाजी महाराज ने 1648 में इस किले को अपने नियंत्रण में लिया था. हालांकि साल 1665 में पुरंदर की संधि के कारण मराठों को यह किला मजबूरन मुगलों को सौंपना पड़ा. लेकि हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक शिवाजी महाराज ने महज पांच साल के बाद, 1670 में अपनी युद्धनीति के बल पर इसे मुगलों से वापस छीन लिया था. इतिहास की मानें तो शिवाजी महाराज ने जब मुगलों के सबसे अमीर शहर सूरत पर विजय प्राप्त की थी, तो वहां मिले खजाने को सुरक्षित रखने के लिए इस किले का इस्तेमाल किया गया था.
क्या है इस किले की अनोखी पहचान?
लोहागढ़ किले की अनोखी पहचान विंचू काटा है, मराठी के इस शब्द का हिंदी अर्थ होता है, बिच्छू की पूंछ. यह मुख्य किले से बाहर की ओर निकला हुआ बहुत लंबा, संकरा और पथरीला रास्ता है, जो कि हूबहू बिच्छू के डंक की तरह दिखाई देता है. पुराने समय में यह हिस्सा किले की सुरक्षाका सबसे बड़ा चक्रव्यूह हुआ करता था, जहां तैनात सैनिक दूर से ही दुश्मनों की हर हरकत को भांप लेते थे और उनपर हमला करते थे. इसके अलावा किले के विशालकाय लोहे के दरवाजे और बुर्ज आज भी मुगलों और मराठों के बीच की गवाही देते हैं.
प्राचीन धरोहर पर लगा दाग
लोहागढ़ का जो किला कभी दुश्मनों के दांत खट्टे करने और गौरव की रक्षा के लिए जाना जाता रहा है, वहां आज पुलिस केतन अग्रवाल की मौत की गुत्थी सुलझाने में लगी है. इस खौफनाक और मार्मिक अपराध ने लोहागढ़ के किले के पत्थरों पर ऐसा दाग लगाया है, जिसने वहां आने वाले हर सैलानी के मन में सिहरन पैदा कर दी है.
