Sweden Lottery System: कई देशों में लॉटरी को सिर्फ एक जुआ माना जाता है. यह ऐसी चीज होती है जिसमें जोखिम होता है और जिसे अक्सर डिस्करेज किया जाता है. लेकिन स्वीडन में कहानी बिल्कुल अलग है. यहां पर लॉटरी सिर्फ किस्मत का खेल नहीं, बल्कि बचत, सामाजिक योगदान और मनोरंजन के मेल के तौर पर भी देखी जाती है.
स्वीडन में लॉटरी सिस्टम
2019 में स्वीडन ने अपने जुआ कानून में बड़ा सुधार किया. इसमें देश के एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया और लाइसेंसिंग प्रणाली लागू की गई है. यहां पर लॉटरी में भाग लेने को अक्सर एक नियमित खर्चे की तरह माना जाता है. यहां लॉटरी खरीदना एक सब्सक्रिप्शन का भुगतान करने जैसा है. रिपोर्ट से ऐसा पता चलता है कि एक औसत स्वीडिश नागरिक हर महीने लॉटरी और गेमिंग पर लगभग 63 डॉलर के करीब खर्च कर देता है.
हैरानी की बात यह है कि कई व्यक्तियों के लिए यह राशि उस राशि से भी ज्यादा हो सकती है जिसे वे पेंशन के लिए अलग रखते हैं. इससे पता चलता है कि रोजमर्रा के वित्तीय व्यवहार में लॉटरी में भाग लेना कितना सामान्य हो गया है.
प्राइज लिंक्ड सेविंग्स
स्वीडन की लॉटरी संस्कृति के पीछे सबसे बड़े विचारों में से एक है प्राइज लिंक्ड सेविंग. बचत पर पारंपरिक ब्याज कमाने के बजाय लोगों को लाटरी ड्रा के जरिए से इनाम जीतने का मौका मिलता है. यहां सबसे बड़ा फायदा मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक है. आपका पैसा जाया नहीं होता आप असल में उसे बचा ही रहे होते हैं. 1980 के दशक के अंत तक स्वीडन की आधी से ज्यादा आबादी ने इस प्रणाली को अपना लिया था.

वेतन आधारित लॉटरी सब्सक्रिप्शन
एक और खास बात इसका सब्सक्रिप्शन आधारित लॉटरी सिस्टम है. इन प्रणालियों में हर महीने किसी व्यक्ति के बैंक खाते से एक निश्चित राशि अपने आप कट जाती है. इसमें जमा की गई राशि को सामाजिक और यहां तक की राजनीतिक उद्देश्यों के लिए फंड कर दिया जाता है.
जीत पर कोई टैक्स नहीं
स्वीडन में लोग लॉटरी की ओर जिस बड़े कारण से आकर्षित हो रहे हैं वह है टैक्स में मिलने वाला फायदा. लाइसेंस लॉटरी से होने वाली जीत खिलाड़ियों के लिए पूरी तरह से टैक्स फ्री होती है. क्योंकि टैक्स का हिसाब किताब स्रोत पर ही हो जाता है इस वजह से प्रतिभागी अपनी कमाई को साफ सुथरा पैसा मानते हैं.
सामाजिक योगदान की एक मजबूत भावना
स्वीडन की लॉटरी सिस्टम का अनोखा पहलू इसका सामाजिक प्रभाव है. लॉटरी से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा चैरिटी के काम, खेलकूद, संस्कृति और सामुदायिक विकास के लिए इस्तेमाल किया जाता है. कई प्रतिभागियों के लिए इससे उन्हें अपने काम में एक मकसद नजर आता है. भले ही वे जीते नहीं फिर भी उन्हें लगता है कि उनका पैसा किसी सार्थक काम में योगदान दे रहा है.
