धमतरी/ छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर स्वतंत्रता-पूर्व जनसंघर्षों के अग्रणी नायक, भूमिया राजा अमर शहीद गेंदसिंह जी की स्मृतियों को संजोते हुए भारतीय दलित साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ राज्य इकाई द्वारा 18 जनवरी 2026 को गोंडवाना भवन, धमतरी के विशाल सभागार में प्रादेशिक सम्यक प्रबोधन एवं प्रतिभा सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शहीद गेंदसिंह के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय पनिका समाज विकास सेवा परिषद, नई दिल्ली के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुंदर दास मानिकपुरी उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में राष्ट्रीय हल्बा आदिवासी समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिव कुमार पात्र (कोण्डागांव), अंतर्राष्ट्रीय कलाकार घनश्याम सिंह ठाकुर (करमा सम्राट, बेमेतरा), डॉ. भरत दास मानिकपुरी (अखिल भारतीय कबीर पंथ धर्म प्रचारक, दुर्ग) तथा प्रसिद्ध पंडवानी गायक महेंद्र सिंह चौहान (साजा) शामिल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अकादमी की महासंरक्षक सुशीला देवी वाल्मीकि ने की, जबकि संचालन प्रांताध्यक्ष प्रो. जी.आर. बंजारे ‘ज्वाला’ ने किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की कड़ी में लोक गायिका ईश्वरी मानिकपुरी (दुर्ग) ने छत्तीसगढ़ राजगीत प्रस्तुत किया। इसके पश्चात कु. संध्या नवरंग (सक्ती) द्वारा मंगल पंथी गीत, कुमारी कृष्णा मिरी (भिलाई) द्वारा जय भीम गीत, गौकरण मानिकपुरी एवं साथियों (गरियाबंद) द्वारा माटी वंदना, अर्जुन सिंह सेन (बलौदाबाजार) द्वारा पंडवानी गायन, लोक कवि चूड़ामणि पात्र (कांकेर) द्वारा काव्य पाठ तथा शिव कुमार पात्र (फरसगांव) द्वारा हल्बी गीत की सशक्त प्रस्तुतियां दी गईं।

समारोह में शैक्षणिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रदेश की 78 विशिष्ट प्रतिभाओं को अवार्ड–2026 राज्य अलंकरण से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में प्रेम सायमन, प्रो. के. मुरारीदास, रवि खरे, भागेश्वर पात्र, डॉ. रोहनलाल भारद्वाज, मदन लहरे, रानी टंडन, सुनील बंजारे, कल्याण साहू, अश्वनी कश्यप, महंत गिरधारी दास, सेवानिवृत्त कैप्टन लालजी श्रीवास्तव, नथेल दास मानिकपुरी, मोहम्मद मुश्ताक सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानियों बहादुर शाह ज़फर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, वीर नारायण सिंह, गुंडाधूर, मींधू कुम्हार, हेमू कालानी के त्याग और बलिदान को स्मरण किया गया। साथ ही सामाजिक क्रांति के अग्रदूत संत माता कर्मा, सद्गुरु कबीर साहेब, सद्गुरु घासीदास साहेब, शिक्षा क्रांति के पुरोधा महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा छत्तीसगढ़ी लोककला संस्कृति के पितामह दाऊ रामचंद्र देशमुख के सपनों के अनुरूप शोषणमुक्त, समतामूलक एवं प्रबुद्ध भारत के निर्माण का संकल्प लिया गया।
