Eggs Ban in Mid day Meal: पश्चिम बंगाल में स्कूल के मिड डे मील में अंडे को लेकर विवाद शुरू हो गया है. दरअसल यह विवाद तब शुरू हुआ जब इस्कॉन द्वारा तैयार किए गए खाने के मेन्यू से अंडे हटा दिए गए. इस्कॉन को मिड डे मील का जिम्मा दे दिया गया है और इस्कॉन ने अब पूरा मेन्यू वेजीटेरियन कर दिया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारत के मिड डे मील प्रोग्राम में अंडे पहली बार कब शामिल किए गए थे और साथ ही बंगाल में इनकी शुरुआत किसने की थी.
अंडे शुरू करने वाला पहला राज्य
स्कूल के मिड डे मील में अंडे देने की शुरुआत सबसे पहले तमिलनाडु में की गई थी. जून 1989 में डीएमके सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम. करूणानिधि ने स्कूली बच्चों में प्रोटीन की मात्रा को बढ़ाने के लिए राज्य के न्यूट्रिशियस मील प्रोग्राम में उबले हुए अंडे शामिल करने का आदेश दिया था. शुरुआत में छात्रों को हर महीने दो उबले हुए अंडे दिए जाते थे. यानी कि हर 15 दिन में एक अंडा दिया जाता था. जो बच्चे अंडे नहीं खाते थे उन्हें केले दे दिए जाते थे.
धीरे धीरे अंडे का वितरण बढ़ाया
प्रोग्राम की सफलता के बाद तमिलनाडु ने धीरे-धीरे अंडे का वितरण बढ़ाया. 1990 और 2008 के बीच हफ्ते में एक बार के बजाय तीन बार अंडे देने शुरू किए गए. 2010 में करुणानिधि सरकार ने स्कूलों में सभी पांच वर्किंग डे पर अंडे उपलब्ध कराकर इस प्रोग्राम को और बड़ा किया. 2013 में जे. जयललिता की लीडरशिप वाली सरकार ने मसाला एग शुरू किया ताकि खाने की न्यूट्रिशनल वैल्यू बनाए रखते हुए उसे छात्रों के लिए और भी ज्यादा बेहतर बनाया जा सके.

मिड डे मील स्कीम की भी शुरुआत तमिलनाडु में हुई
तमिलनाडु को भारत के मिड डे मील प्रोग्राम का जन्म स्थान माना जाता है. मद्रास म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने सबसे पहले 1920 में स्कूल फीडिंग प्रोग्राम शुरू किया था. 1956 में मुख्यमंत्री के कामराज द्वारा इस पूरे राज्य में फैलाया गया. 1982 में मुख्यमंत्री एम जी रामचंद्रन ने इस प्रोग्राम को न्यूट्रिशियस मील स्कीम में बदल दिया. इसके साथ इस प्रोग्राम की पहुंच काफी ज्यादा बढ़ी. 1989 में अंडे शामिल करना बच्चों के पोषण को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम था.
पश्चिम बंगाल में कब हुई शुरुआत?
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान अंडे PM-POSHAN का हिस्सा बन गए. राज्य ने कुपोषण से निपटने की जरूरत और बच्चों के लिए प्रोटीन के सस्ते स्त्रोत के तौर पर सरकारी स्कूल में हर हफ्ते कम से कम एक बार अंडे देना अनिवार्य कर दिया.
