किलेपार गांव में हुई संतु राम देशमुख की निर्मम हत्या न केवल एक व्यक्ति की जान लेने की वारदात है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा प्रश्नचिन्ह भी है। ग्रामीण इलाकों में पुलिस गश्त और खुफिया तंत्र की कमी एक बार फिर उजागर हुई है।
संतु राम जैसा मेहनतकश और शांत स्वभाव का व्यक्ति अगर अपने ही घर के पास बेरहमी से मारा जाए और किसी को भनक तक न लगे, तो यह प्रशासन के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।

पुलिस ने भले ही जल्द कार्रवाई और दोषियों को पकड़ने का भरोसा दिलाया है, पर असली भरोसा तभी लौटेगा जब अपराधी कानून के शिकंजे में आएंगे और गांवों में सुरक्षा का माहौल महसूस होगा।
गांवों में भय का साया न फैले — यह अब प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
