भारत ने अक्टूबर 2026 में प्रतिदिन रिकॉर्ड 5.6 मिलियन बैरल कच्चे तेल का इंपोर्ट किया है. अब तक दर्ज किया गया यह सबसे ज्यादा दैनिक स्तर है. यह विदेशी आपूर्ति पर देश के निर्भरता के पैमाने और बड़े तेल उत्पादक देश के साथ इसके संबंध के महत्व पर रोशनी डालता है.
इसका मतलब यह है कि इंपोर्ट देश की ज्यादातर तेल जरूरतों को पूरा करता है. इससे आपूर्तिकर्ताओं की पसंद और खरीद में विविधता लाने की क्षमता इसकी ऊर्जा रणनीति का एक जरूरी हिस्सा बन जाती है. वर्तमान में रूस की पहचान भारत के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ता के रूप में की जाती है. उसके बाद संयुक्त अरब अभी रात का स्थान आता है.
रूस सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता
हाल के महीनों में भारत के कुल कच्चे तेल इंपोर्ट में रूस के हिस्सेदारी लगभग 44% है. यह प्रतिदिन लगभग 2 मिलियन बैरल की आपूर्ति करता है. यह हिस्सेदारी आपूर्तिकर्ताओं के बीच रूस को भारत का एक बड़ा तेल व्यापार भागीदारी बनाती है. भारतीय रिफाइनरियों ने पर्याप्त मात्रा में रूसी कच्चे तेल का स्रोत बनाना जारी रखा है. इसी के साथ रिफाइनर अपने परचेजिंग फैसलों को समायोजित करने के साथ-साथ यह अनुपात बदल भी सकता है.
साल भर में रैंकिंग तय नहीं होती. भारतीय रिफाइनरियां नियमित रूप से अपनी सोर्सिंग और विविधीकरण रणनीति को संशोधित करती हैं. इसी के साथ व्यक्तिगत आपूर्तिकर्ताओं द्वारा रखे गए शेयर महीने दर महीने बदल सकते हैं.

संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और इराक
संयुक्त अरब अमीरात आपूर्तिकर्ताओं की लिस्ट में दूसरे नंबर पर आता है. इसका भारत के तेल इंपोर्ट में लगभग 17.4% का योगदान है. इसकी स्थिति इसे भारतीय रिफाइनरियों के लिए एक जरूरी खाड़ी स्रोत बनाती है.
संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के आयातित तेल का लगभग 5.1 प्रतिशत आपूर्ति करता है. साल के अलग-अलग महीनों के दौरान इराक भी एक बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. इन देशों की स्थिति अलग-अलग हो सकती है क्योंकि भारत के रिफाइनर अपने द्वारा खरीदे जाने वाले कच्चे तेल के मिश्रण को बदलते हैं. कुल मिलाकर रूस, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका बताए गए शेयर के आधार पर लगभग दो तिहाई इंपोर्ट करते हैं और इराक एक दूसरा बड़ा स्रोत है.
भारत विदेशी तेल पर निर्भर क्यों है?
भारत अपनी जरूरत का 80% से 85% कच्चा तेल इंपोर्ट करता है. अक्टूबर में प्रतिदिन 5.6 मिलियन बैरल का रिकॉर्ड स्तर देश में आने वाले विदेशी कच्चे तेल की मात्रा को दर्शाता है. इंपोर्ट के जरिए से पूरी होने वाली जरूरत का इतना बड़ा हिस्सा होने की वजह से भारत एक स्रोत के बजाय कई अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है. कीमत और कमर्शियल स्थिति में बदलाव के मुताबिक रिफाइनर अपना कच्चा तेल खरीदने की जगह को बदल सकते हैं.

रणनीति में बदलाव के कारण वेनेजुएला को महत्व
2026 के बीच में रूस के यूराल क्रूड पर छूट कम हो गई और कीमत बढ़ने लगी. भारतीय रिफाइनरियों ने अपनी सोर्सिंग को एडजस्ट करके प्रतिक्रिया दी. उन्होंने वेनेजुएला से बड़ी मात्रा में काफी ज्यादा किफायती कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया. इससे कुछ हद तक रूसी आपूर्ति पर उनकी निर्भरता कम करने में मदद मिली.
रिलायंस की जामनगर रिफायनरी वेनेजुएला कच्चे तेल की खरीद के रूप में पहचानी जाने वाली सुविधाओं में से एक है. यह कदम भारतीय रिफाइनरों द्वारा बदलती कीमतों पर प्रतिक्रिया देने और आपूर्तिकर्ता का लागत फायदा कम होने पर ऑप्शन तलाशने के प्रयास को दर्शाता है.
एक बदलती आपूर्तिकर्ता तस्वीर
भारत का तेल व्यापार इसकी पर्याप्त इंपोर्टेड जरूरत और कच्चे तेल की खरीद की बदलती अर्थव्यवस्था दोनों से आकर लेता है. अनुमानित 44% हिस्सेदारी और लगभग 2 मिलियन बैरल प्रति दिन के साथ रूस सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. संयुक्त अरब अमीरात 17.4% के साथ दूसरे स्थान पर है, संयुक्त राज्य अमेरिका का योगदान लगभग 5.1% है और इराक भी अलग-अलग समय में बड़ी भूमिका निभाता है.
