सूरजपुर में सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड में गुरुवार (8 अक्टूबर) को अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया. हेड कांस्टेबल के परिवार को बेरहमी से रेप और हत्या करने वाले दरिंदों को उनके मुकाम तक पहुंचा दिया गया.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई सुनवाई में विशेष न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू, फूल सिंह उर्फ रिंकू और चंद्रकांत चौधरी को सीधे फांसी के फंदे पर लटकाने का फरमान जारी किया. जबकि साजिश की कड़ी बने चौथे आरोपी आर्यन विश्वकर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई.
अदालत ने फैसला सुनाने से पहले मुख्य आरोपी कुलदीप के बेखौफ और अड़ियल आचरण पर भारी नाराजगी जाहिर की. वहीं, फैसले के बाद पीड़ित परिवार, पुलिस और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस लेते हुए न्याय मिलने पर खुशी जताई.
डीएनए-फिंगरप्रिंट और डिजिटल सबूत बने न्याय के आधार
सूरजपुर में प्रधान आरक्षक के परिवार के साथ हुई यह बर्बर खूनी वारदात पुलिस महकमे के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई थी, क्योंकि दोहरे कत्ल की इस सनसनीखेज वारदात का कोई भी सीधा चश्मदीद गवाह मौजूद नहीं था. इसके बावजूद खाकी ने हार नहीं मानी.
पुलिस टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्यों का ऐसा अभेद्य चक्रव्यूह तैयार किया कि कातिलों के बचने का कोई रास्ता नहीं बचा. मौके से मिले फिंगरप्रिंट, डीएनए रिपोर्ट, ब्लड ग्रुपिंग, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज जैसे पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को अदालत में पेश कर पुलिस ने गुनाह की पूरी साजिश बेनकाब कर दिया.

13 अक्टूबर 2024 की रात वारदात को दिया अंजाम
अदालत के अंदर सरकारी वकील ने 13 अक्टूबर 2024 की उस काली रात की हैवानियत का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोल कर रख दिया. सरकारी वकील ने बताया कि 13 अक्टूबर 2024 की शाम पीड़ित हेड कांस्टेबल ने तड़ीपार कुलदीप साहू को उसके साथियों के साथ बस स्टैंड पर देखा तो उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन दरिंदों ने पहले बिरयानी सेंटर के पास पुलिस सिपाही घनश्याम सोनवानी पर खौलता तेल उड़ेला.
इसके बाद हेड कांस्टेबल और अन्य पुलिसकर्मियों पर गाड़ी चढ़ाकर उन्हें कुचलने की कोशिश की और सभी को तलवार से काट डालने की धमकी देकर फरार हो गए. इसके बाद चारों दरिंदों ने प्रधान आरक्षक के घर में घुसकर उसकी 11 साल की मासूम बेटी पर 28 और उसकी पत्नी पर 33 बार धारदार हथियारों से जानलेवा हमला किया.
गंभीर रूप से जख्मी हालत में महिला के साथ रेप भी किया. आरोपियों के कपड़ों पर लगे खून और कुलदीप के फिंगरप्रिंट्स को कोर्ट में पुख्ता प्रमाण माना गया. अदालत ने माना कि अपराधियों में कोई पछतावा नहीं था. लिहाजा मुख्य आरोपी कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके और फूल सिंह उर्फ रिंकू को फांसी की सजा दी गई, जबकि 20 साल की उम्र और केवल फोन पर साजिश का हिस्सा रहने के चलते आर्यन विश्वकर्मा को उम्रकैद से दंडित किया गया.
लोग कर रहे थे एनकाउंटर की मांग
सूरजपुर के इस दोहरे हत्याकांड में पीड़ितों को न्याय मिलने में हो रही देरी से आम लोगों में बेहद नाराज़गी थी. लोग चारों दरिंदो का एनकाउंटर करने की लगातार मांग कर रहे थे. लेकिन गुरुवार को अदालत ने आखिर न्याय कर दिया. जिसके बाद पुलिस महकमे और आम लोगों में खुशी की लहर है.

अदालत का फैसला सिर्फ एक सजा नहीं, बल्कि कानून के इकबाल की सबसे बड़ी जीत है. बिना किसी चश्मदीद गवाह के खाकी की वैज्ञानिक तफ्तीश और अदालत में सरकारी वकील की दमदार दलीलों ने साबित कर दिया कि वर्दी पर हमला करने और बेकसूरों का खून बहाने वालों के लिए कानून की चौखट पर कोई रहम नहीं होता.
अदालत के इस फैसले ने जहां पीड़ित परिवार के जख्मों पर इंसाफ का मरहम लगाया. वहीं समाज में यह साफ पैगाम भी दे दिया कि जुर्म की दुनिया में खुद को हीरो समझने वालों का आखिरी मुकाम सिर्फ और सिर्फ फांसी का फंदा ही होता है.
