US Military: दूसरे देशों में अमेरिका की सेना की मौजूदगी लंबे समय से दुनिया की भूराजनीति की पहचान रही है. यूरोप और एशिया से लेकर मिडल ईस्ट और अफ्रीका तक अमेरिकी सैनिक दुनिया भर के 80 से ज्यादा देशों में तैनात हैं. हाल ही में जर्मनी में तैनात हजारों सैनिकों के अमेरिका लौटने की खबरों के बाद इस बारे में चर्चा और भी ज्यादा तेज हो गई है. आइए जानते हैं कि अमेरिका अपनी सेना को इतने सारे देशों में क्यों फैला कर रखता है और यह सेना असल में किसकी रक्षा करती है.
दूसरे देशों में सेना तैनात
अमेरिकी सेना की दुनिया भर में तैनाती एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है. इसे फॉरवर्ड प्रेजेंस कहा जाता है. अमेरिकी सीमा के पास खतरों के पैदा होने का इंतजार करने के बजाय इस रणनीति का मकसद पहले से ही सैनिकों को अहम इलाकों के पास तैनात रखना है. इससे अमेरिका दुनिया में कहीं भी होने वाले युद्ध, संकट या फिर सुरक्षा खतरों पर तेजी से प्रतिक्रिया दे पाता है. ये विदेशी ठिकाने कोई अस्थायी कैंप नहीं हैं. ये एक लंबे समय से चले आ रहे सैन्य नेटवर्क का हिस्सा हैं.

सहयोगी देश और रणनीतिक साझेदारों की सुरक्षा
दूसरे देशों में अमेरिकी सेना तैनात करने की सबसे बड़ी वजह सहयोगी देशों की सुरक्षा करना है. जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अमरीकी सेना को अपने यहां इस वजह से जगह देते हैं क्योंकि उन्हें उत्तर कोरिया और चीन के बढ़ते प्रभाव से जुड़े क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे महसूस होते हैं.
यूरोप में अमेरिकी सैन्य ठिकाने नाटो के सहयोगी देशों को मदद देते हैं. साथ ही रूस से होने वाले संभावित खतरों के खिलाफ एक रुकावट का काम करते हैं.
