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डिजिटल अरेस्ट का खौफ जारी! जागरूकता के बावजूद क्यों नहीं रुक रहे ये ऑनलाइन ठगी के हमले?

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देशभर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हो रही ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. हाल ही में Pune के 86 वर्षीय रिटायर्ड बैंक मैनेजर से करीब 1.3 करोड़ रुपये ठग लिए गए. ठगों ने खुद को Mumbai पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर वर्दी में बात की और फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाया. उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी गई और डिजिटल निगरानी में होने का दावा किया गया. डर के माहौल में उनसे कई खातों में रकम ट्रांसफर करवाई गई. बाद में परिवार को शक हुआ तो मामला उजागर हुआ और जांच शुरू हुई.

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इसी तरह Thrissur के इरिंजालकुड़ा में एक 84 वर्षीय उद्योगपति से 5.4 करोड़ रुपये और Kannur में एक बुजुर्ग दंपती से 1.5 करोड़ रुपये ठगे गए. कहीं खुद को प्रवर्तन एजेंसी का अधिकारी बताया गया, तो कहीं आधार कार्ड को आतंकी मामले से जोड़ने का झूठा आरोप लगाकर डर पैदा किया गया.
इसी तरह Thrissur के इरिंजालकुड़ा में एक 84 वर्षीय उद्योगपति से 5.4 करोड़ रुपये और Kannur में एक बुजुर्ग दंपती से 1.5 करोड़ रुपये ठगे गए. कहीं खुद को प्रवर्तन एजेंसी का अधिकारी बताया गया, तो कहीं आधार कार्ड को आतंकी मामले से जोड़ने का झूठा आरोप लगाकर डर पैदा किया गया.
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विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिर्फ साइबर क्राइम नहीं बल्कि मानसिक नियंत्रण की रणनीति है. ठग तीन हथियारों का इस्तेमाल करते हैं—अधिकार (Authority), जल्दबाजी (Urgency) और गोपनीयता (Secrecy). जब किसी को बताया जाता है कि उसके नाम पर गिरफ्तारी वारंट है या वह जांच के घेरे में है तो सबसे पहले उसकी प्रतिष्ठा बचाने की चिंता हावी हो जाती है. इसी दबाव में लोग बिना सत्यापन के निर्देश मान लेते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिर्फ साइबर क्राइम नहीं बल्कि मानसिक नियंत्रण की रणनीति है. ठग तीन हथियारों का इस्तेमाल करते हैं—अधिकार (Authority), जल्दबाजी (Urgency) और गोपनीयता (Secrecy). जब किसी को बताया जाता है कि उसके नाम पर गिरफ्तारी वारंट है या वह जांच के घेरे में है तो सबसे पहले उसकी प्रतिष्ठा बचाने की चिंता हावी हो जाती है. इसी दबाव में लोग बिना सत्यापन के निर्देश मान लेते हैं.
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अचानक खतरे का संकेत मिलने पर दिमाग फाइट या फ्लाइट मोड में चला जाता है. ऐसे समय में तर्कशील सोच कमजोर पड़ जाती है और व्यक्ति तुरंत राहत पाने के लिए कदम उठाता है. वीडियो कॉल पर वर्दी, आधिकारिक बैकग्राउंड, कानूनी भाषा और नकली दस्तावेज दिखाकर ठग वास्तविकता जैसा माहौल बना देते हैं. हमारा दिमाग जो देखता है उसे सच मानने लगता है यही उनकी सबसे बड़ी चाल है.
अचानक खतरे का संकेत मिलने पर दिमाग फाइट या फ्लाइट मोड में चला जाता है. ऐसे समय में तर्कशील सोच कमजोर पड़ जाती है और व्यक्ति तुरंत राहत पाने के लिए कदम उठाता है. वीडियो कॉल पर वर्दी, आधिकारिक बैकग्राउंड, कानूनी भाषा और नकली दस्तावेज दिखाकर ठग वास्तविकता जैसा माहौल बना देते हैं. हमारा दिमाग जो देखता है उसे सच मानने लगता है यही उनकी सबसे बड़ी चाल है.
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शिक्षा व्यक्ति को जानकारी तो देती है लेकिन भावनात्मक दबाव से पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाती. उच्च पद या सामाजिक प्रतिष्ठा रखने वाले लोग बदनामी के डर से और जल्दी घबरा जाते हैं. ठग इसी इमेज पर वार करते हैं जैसे आधार या बैंक खाते को जांच से जोड़कर इसे व्यक्तिगत हमला बना देना.
शिक्षा व्यक्ति को जानकारी तो देती है लेकिन भावनात्मक दबाव से पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाती. उच्च पद या सामाजिक प्रतिष्ठा रखने वाले लोग बदनामी के डर से और जल्दी घबरा जाते हैं. ठग इसी इमेज पर वार करते हैं जैसे आधार या बैंक खाते को जांच से जोड़कर इसे व्यक्तिगत हमला बना देना.
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ठग पूछताछ जैसी शैली अपनाते हैं कड़े लहजे में बात, लगातार निगरानी का एहसास और कॉल काटने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी. पीड़ित को लगता है कि कॉल छोड़ना और बड़ा जोखिम है. लगातार दबाव से मानसिक थकान बढ़ती है और अंत में जो कहा जा रहा है वही कर देना आसान विकल्प लगने लगता है.
ठग पूछताछ जैसी शैली अपनाते हैं कड़े लहजे में बात, लगातार निगरानी का एहसास और कॉल काटने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी. पीड़ित को लगता है कि कॉल छोड़ना और बड़ा जोखिम है. लगातार दबाव से मानसिक थकान बढ़ती है और अंत में जो कहा जा रहा है वही कर देना आसान विकल्प लगने लगता है.
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विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ यह जान लेना कि ऐसा स्कैम होता है, पर्याप्त नहीं है. लोगों को भावनात्मक अभ्यास (Emotional Drill) की जरूरत है जैसे घबराहट की स्थिति में खुद से कहना, मैं कॉल काटकर आधिकारिक नंबर से पुष्टि करूंगा. असली सुरक्षा तब होगी जब लोग डर के क्षण में रुककर सोचने की आदत डालेंगे.
विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ यह जान लेना कि ऐसा स्कैम होता है, पर्याप्त नहीं है. लोगों को भावनात्मक अभ्यास (Emotional Drill) की जरूरत है जैसे घबराहट की स्थिति में खुद से कहना, मैं कॉल काटकर आधिकारिक नंबर से पुष्टि करूंगा. असली सुरक्षा तब होगी जब लोग डर के क्षण में रुककर सोचने की आदत डालेंगे.
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कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहती है. घबराहट महसूस होते ही कॉल काटें, परिवार से बात करें और आधिकारिक माध्यम से जानकारी वेरिफाई करें.
कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहती है. घबराहट महसूस होते ही कॉल काटें, परिवार से बात करें और आधिकारिक माध्यम से जानकारी वेरिफाई करें.

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