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Bangladesh Prime Minister: क्या कोई हिंदू भी बन सकता है बांग्लादेश का प्रधानमंत्री, कैसा है वहां का संविधान?

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Bangladesh Prime Minister: 13 फरवरी 2026 के चुनावों के बाद अब तारिक रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बनने वाले हैं. उन्हीं चुनावों में कई हिंदू उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की. गायेश्वर चंद्र रॉय ढाका-3 से जीते, जबकि निताई राय चौधरी वेस्ट मागुरा सीट से जीते. इसी बीच एक अहम सवाल लोगों के बीच आ रहा है कि क्या कोई हिंदू भी बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बन सकता है. आइए जानते हैं कैसा है वहां का संविधान.

प्रधानमंत्री बनने के नियम 

थ्योरी के हिसाब से कोई हिंदू भी बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बन सकता है. बांग्लादेश के संविधान के मुताबिक प्रधानमंत्री का किसी खास धर्म से होना जरूरी नहीं है. बांग्लादेश के संविधान के तहत कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री बन सकता है अगर कुछ शर्ते पूरी हों. संविधान इस पद के लिए इस्लाम या फिर किसी दूसरे धर्म को जरूरी नहीं मानता.

संसद सदस्य होना जरूरी है 

प्रधानमंत्री को सबसे पहले जातीय संसद का चुना हुआ सदस्य होना चाहिए. जातीय संसद बांग्लादेश की नेशनल पार्लियामेंट है. एमपी हुए बिना किसी को प्रधानमंत्री नहीं बनाया जा सकता.

नागरिकता और उम्र की जरूरत 

व्यक्ति बांग्लादेश का नागरिक होना चाहिए और उसकी उम्र कम से कम 25 साल होनी चाहिए. यह बुनियादी संवैधानिक जरूरतें हैं जो सभी उम्मीदवारों पर लागू होती हैं. अब भले ही उनका धर्म कुछ भी हो.

 

 

संसद में बहुमत का समर्थन 

प्रधानमंत्री को संसद के ज्यादातर सदस्यों का विश्वास हासिल होना चाहिए. बांग्लादेश जैसे संसदीय लोकतंत्र में बहुमत वाली पार्टी या फिर गठबंधन के नेता को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाता है. ऐसा कोई भी क्लॉज नहीं है जो इस पद को सिर्फ मुस्लिम तक सीमित करता हो.

बांग्लादेश के संविधान का धार्मिक ढांचा 

संविधान का आर्टिकल 2A इस्लाम को देश का धर्म घोषित करता है. इसका मतलब है कि इस्लाम को देश स्तर पर सिंबॉलिक मान्यता मिली हुई है. इसी के साथ आर्टिकल 12 सेकुलरिज्म को देश की पॉलिसी के एक बुनियादी सिद्धांत के रूप में मान्यता देता है. यह धार्मिक पहचान और सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार के बीच एक संवैधानिक संतुलन बनाता है.

धर्म की आजादी और बराबरी 

आर्टिकल 41 हर नागरिक को अपने धर्म को आजादी से मानने और फैलाने का अधिकार देता है. इसी के साथ आर्टिकल 28 साफ तौर पर धर्म, नस्ल, जाति या लिंग के आधार पर देश द्वारा भेदभाव पर रोक लगाता है. इसके अलावा आर्टिकल 19 सभी नागरिकों के लिए मौके की बराबरी पक्का करता है.

क्या कोई हिंदू प्रधानमंत्री बन सकता है?

कानूनी तौर पर कोई भी हिंदू नागरिक प्रधानमंत्री बन सकता है. बस उसे पार्लियामेंट का मेंबर चुना जाना चाहिए. इसी के साथ अगर उसे जातीय संसद में ज्यादातर सपोर्ट मिलता है और वह संवैधानिक क्राइटेरिया को पूरा करता है तो उसे प्रधानमंत्री बनने से रोकने वाली कोई भी कानूनी रुकावट नहीं है.

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