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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर दावेदारी और यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. कई बड़े अमेरिकी नेताओं ने ट्रंप की इस नीति की तीखी आलोचना की है. इसे अमेरिका की प्रतिष्ठा, आर्थिक हितों और NATO गठबंधन के लिए खतरनाक बताया है. साथ ही, हालिया सर्वे से पता चला है कि अमेरिकी जनता में ट्रंप की इस महत्वाकांक्षा को बहुत कम समर्थन मिल रहा है. यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए ट्रूप्स भेजने शुरू कर दिए हैं, जिससे ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में तनाव और बढ़ गया है.

अमेरिकी नेताओं ने ट्रंप की तीखी आलोचना की

ट्रंप की नीति पर अमेरिकी राजनीतिक हलकों में कड़ी प्रतिक्रियाएं आई हैं. डेमोक्रेट और कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने इसे ‘पागलपन’ और ‘स्टूपिड’ बताया है…

  • सिनेटर मार्क केली: उन्होंने X लिखा, ‘यूरोपीय देशों के ट्रूप्स ग्रीनलैंड में अमेरिका से बचाने के लिए पहुंच रहे हैं. सोचिए. और अब ट्रंप हमारे सहयोगियों पर टैरिफ लगा रहा है, जिससे आपको ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे ताकि वो ऐसी जगह हासिल कर सके जिसकी हमें जरूरत नहीं है. राष्ट्रपति हमारे रेपुटेशन और रिलेशनशिप्स को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे हम असुरक्षित हो रहे हैं. अगर कुछ नहीं बदला तो हम हर दिशा में दुश्मनों से घिरे अकेले रह जाएंगे. कांग्रेस के रिपब्लिकन्स को ट्रंप के खिलाफ खड़े होना चाहिए.’
  • बर्नी सैंडर्स: उन्होंने कहा, ‘ट्रंप 8 NATO सहयोगियों पर टैरिफ बढ़ा रहा है क्योंकि वे सही तरीके से डेनमार्क की ग्रीनलैंड की आजादी का समर्थन कर रहे हैं. ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए हमारे सबसे करीबी गठबंधनों को तोड़ना, जहां डेनमार्क हमें पहले से फ्री यूज देता है, पागलपन है. कांग्रेस को NO कहना चाहिए.’
  • सिनेटर थॉम टिलिस: रिपब्लिकन सिनेटर ने आलोचना करते हुए लिखा, ‘ग्रीनलैंड में ट्रेनिंग के लिए छोटी संख्या में ट्रूप्स भेजने पर अमेरिका, अमेरिकी बिजनेस और अमेरिकी सहयोगियों के लिए बुरा रिस्पॉन्स है. ये पुतिन, शी और अन्य दुश्मनों के लिए अच्छा है, जो NATO को बंटा हुआ देखना चाहते हैं. ये प्रेसिडेंट ट्रंप की लेगेसी को हर्ट करता है और NATO को मजबूत बनाने के उनके सालों के काम को कमजोर करता है.’
  • सिनेटर पैटी मुर्रे: उन्होंने अपने रिपब्लिकन कॉलीग्स से अपील की, ‘बहुत हो गया. सीनेट को वोट करके इन टैरिफ को ब्लॉक करना चाहिए और ग्रीनलैंड पर सैन्य बल के इस्तेमाल को रोकना चाहिए. ट्रंप रीयल टाइम में हमारे गठबंधनों को तोड़ रहे हैं. आर्थिक और डिप्लोमैटिक परिणाम कैटास्ट्रॉफिक होंगे.’
  • जॉन बोल्टन, पूर्व NSA: उन्होंने कहा, ‘मैंने लंबे समय से कहा है कि सुरक्षित ग्रीनलैंड वेस्ट के लिए क्रिटिकल है. लेकिन ट्रंप का ग्रीनलैंड के बदले सहयोगियों पर टैरिफ थ्रेट वाला लेटेस्ट बिजार आउटबर्स्ट आर्कटिक में सुरक्षा और स्थिरता को बहुत मुश्किल बना देगा.’

 

 

ये बयान दिखाते हैं कि ट्रंप की नीति पर पार्टी लाइंस से ऊपर उठकर आलोचना हो रही है. कई नेताओं ने कांग्रेस से टैरिफ और सैन्य कार्रवाई को ब्लॉक करने की मांग की है, ताकि NATO में दरार न पड़े और दुश्मन ताकतें जैसे रूस व चीन फायदा न उठाएं.

अमेरिकी जनता ही ट्रंप के खिलाफ

Reuters और Ipsos के हालिया सर्वे से पता चला है कि ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे के इरादे को अमेरिकी जनता से बहुत कम समर्थन मिल रहा है. सिर्फ 17% अमेरिकियों ने ट्रंप के दावे का समर्थन किया है, यानी 5 में से 1 अमेरिकी भी पूरी तरह सहमत नहीं है. सिर्फ 10 में से 1 अमेरिकी चाहता है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई करे. ज्यादातर अमेरिकी, चाहे रिपब्लिकन हों या डेमोक्रेट, सैन्य हस्तक्षेप और बल प्रयोग के खिलाफ हैं.

सर्वे में बड़ी घरेलू असहमति दिखी है, जहां लोग ट्रंप की कूटनीतिक इच्छाओं को खारिज कर रहे हैं. यह सर्वे वेनेजुएला के नेता निकोलस मदुरो के पकड़े जाने के एक हफ्ते बाद किया गया था. इससे साफ है कि ट्रंप की योजना को घरेलू स्तर पर मजबूत बैकिंग नहीं मिल रही है.

यूरोपीय देशों ने ट्रूप्स की तैनाती की

यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड की आजादी का समर्थन किया है और डेनमार्क की योजना के तहत NATO की बड़ी और स्थायी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर ली है. 15 जनवरी 2026 को यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में छोटी संख्या में ट्रूप्स (37-38 सैनिक) भेजे, जिसकी वजह ट्रेनिंग और रक्षा बताई गई. फ्रांस ने ट्रंप की धमकियों से नहीं डरने की बात कही है. ग्रीनलैंड की राजधानी नूक और डेनमार्क की कोपेनहेगेन में हजारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए, जहां ‘हैंड्स ऑफ ग्रीनलैंड’ जैसे नारे लगाए गए.

ट्रंप की योजना और धमकी क्या है?

ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने या पूरी तरह नियंत्रित करने की बात कर रहे हैं. उन्होंने इसे अमेरिकी राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है. हाल ही में अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों के बीच हाई-स्टेक मीटिंग हुई, जहां ट्रंप ने अपनी इच्छा दोहराई और कहा कि ‘कुछ समाधान हो जाएगा.’

ट्रंप का दावा है कि ग्रीनलैंड आर्कटिक संसाधनों और रणनीतिक ठिकानों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां रूस और चीन जैसी ताकतों से मुकाबला है. लेकिन डेनमार्क (जिसके अधीन ग्रीनलैंड है) और ग्रीनलैंड के नेता इसे सिरे से खारिज कर रहे हैं. ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडेरिक नीलसेन ने कहा है कि क्षेत्र ‘किसी भी हालत में’ अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा. यह फैसला डेनमार्क और ग्रीनलैंड की स्थानीय जनता ही करेगी.

ट्रंप ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर असहमति जताने वाले 8 NATO सहयोगी देशों (डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स और फिनलैंड) पर 1 फरवरी से 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जो जून तक 25% तक बढ़ सकता है. ट्रंप ने सैन्य बल का इस्तेमाल भी खारिज नहीं किया है. व्हाइट हाउस ने कहा कि यूरोपीय ट्रूप्स की तैनाती से उनके फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

यह विवाद अमेरिका-यूरोप तनाव को बढ़ा रहा है, जिससे आर्थिक युद्ध का खतरा है. NATO की एकजुटता कमजोर हो सकती है और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दों पर ध्यान भटक सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे अमेरिका की वैश्विक छवि खराब हो रही है. डेनमार्क और ग्रीनलैंड अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन और स्थानीय इच्छाओं का सम्मान करने पर जोर दे रहे हैं.

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