📍 धमतरी/ 28 अगस्त नगर निगम धमतरी में कथित डीजल घोटाले को लेकर कांग्रेस द्वारा किए गए हालिया प्रदर्शन ने अब राजनीतिक और कानूनी रंग पकड़ लिया है। भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों और पदाधिकारियों ने प्रदर्शन के दौरान महापौर रामू रोहरा के खिलाफ लगाए गए आपत्तिजनक नारों को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
क्या है मामला:
20 अगस्त को जिला युवा कांग्रेस द्वारा नगर निगम में कथित डीजल घोटाले को लेकर प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर निगम भवन के सामने पहुंचकर जमकर नारेबाजी की थी। भाजपा पार्षदों का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महापौर रामू रोहरा के खिलाफ “रामू रोहरा चोर है” जैसे व्यक्तिगत व अपमानजनक नारे लगाए।
भाजपा पार्षदों का पक्ष:
गुरुवार को भाजपा पार्षद दल सिटी कोतवाली पहुंचा और सोरिद वार्ड के पार्षद विशु देवांगन सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ आवेदन देकर एफआईआर की मांग की। आवेदन में कहा गया है कि:
“बिना किसी ठोस साक्ष्य के महापौर पद पर बैठे व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से ‘चोर’ कहना न केवल पद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि भाजपा संगठन की छवि को भी नुकसान पहुंचाता है।”
उन्होंने इसे मानहानिकर, अपमानजनक और भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 के अंतर्गत दण्डनीय कृत्य बताया है।
एफआईआर की मांग करने पहुंचे प्रमुख पार्षद और पदाधिकारी:
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नरेंद्र रोहरा
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विजय मोटवानी
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तल्लीन पुरी गोस्वामी
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संतोष सोनकर
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कुलेश सोनी
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अनीता अग्रवाल
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विभा चंद्राकर
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भाजपा महामंत्री महेंद्र पंडित
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अविनाश दुबे
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गौरव मगर सहित अन्य भाजपा कार्यकर्ता
भाजपा का आरोप:
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यह नारा व्यक्तिगत मान-सम्मान और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला है।
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निगम क्षेत्र में लोगों के बीच महापौर की छवि धूमिल हो रही है।
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राजनीतिक विरोध के नाम पर सार्वजनिक रूप से मानहानि करना दंडनीय है।
कानूनी संदर्भ:
भाजपा पार्षदों ने कांग्रेस नेताओं के कृत्य को भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 (मानहानि/अपमान) के अंतर्गत गंभीर अपराध बताया है और विधिक कार्यवाही की मांग की है।
पृष्ठभूमि:
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कथित डीजल घोटाले को लेकर नगर निगम प्रशासन जांच प्रक्रिया पहले ही प्रारंभ कर चुका है।
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कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन कर महापौर को सीधे आरोपित किया, जिसे भाजपा ने दुर्भावनापूर्ण बताया है।
अब आगे क्या?
पुलिस द्वारा मामले की जांच कर एफआईआर दर्ज करने या न करने पर निर्णय लिया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में नगर निगम चुनाव और राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है।