धमतरी/ गंगरेल बांध के डूब प्रभावितों की लंबित भूमि आवंटन और अधिकारों की मांग को लेकर बोटिंग पॉइंट गंगरेल बांध में 12 अक्टूबर से जारी जल सत्याग्रह के तीसरे दिन नौ आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ गई। पानी में लगातार डूबे रहने के कारण आंदोलनकारियों को पैर और कमर में दर्द के साथ चक्कर आने जैसी शिकायतें होने लगीं। स्थिति बिगड़ने पर सभी नौ आंदोलनकारियों को 108 एम्बुलेंस की मदद से धमतरी जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उन्हें भर्ती कराया गया है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी छह साल से लंबित है मामला
जल सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे हर्ष मरकाम ने बताया कि गंगरेल बांध के डूब प्रभावितों के भूमि आवंटन एवं अधिकारों के संबंध में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने WPC No. 5575/2008 एवं WPC No. 3055/2016 में 16 दिसंबर 2020 को आदेश पारित किया था। आंदोलनकारियों का आरोप है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद करीब छह वर्षों से पात्र प्रभावितों की आवश्यक जांच और भूमि आवंटन की प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
डूब प्रभावितों का कहना है कि वे लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। इसी के विरोध में प्रभावितों ने 12 अक्टूबर से जल सत्याग्रह और अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया है।
इन नौ आंदोलनकारियों की बिगड़ी तबीयत
जल सत्याग्रह के दौरान तबीयत बिगड़ने वाले आंदोलनकारियों में लक्ष्मी बाई पटेल (60 वर्ष), किसनपुरी; हलाल मरकाम (60 वर्ष), डोमपदर बेलर; इंदल सिंह नेताम (57 वर्ष), नवागांव बेलर; कृपा राम सिन्हा (82 वर्ष), भटगांव; पुरुषोत्तम मंडावी (48 वर्ष), कोलियारी तिर्रा; शम्भू राम (65 वर्ष), बनबगौद; राजकुमारी वारडे (38 वर्ष), सलना; भारती पटेल (55 वर्ष), किसनपुरी और चन्द्रहास मंडावी (75 वर्ष), मड़वापथरा शामिल हैं।

सभी को बिगड़ती तबीयत के बाद 108 एम्बुलेंस से जिला अस्पताल धमतरी ले जाया गया।
प्रशासन का दावा-समिति कर रही दस्तावेजों की जांच
जिला प्रशासन के अनुसार, डूब प्रभावितों के दावों और भूमि आवंटन से जुड़े मामले में समिति के माध्यम से जांच की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। जांच के तहत राजस्व अभिलेखों, पट्टा आवंटन एवं निरस्तीकरण से संबंधित दस्तावेजों, ग्राम नक्शों, खसरा अभिलेखों, वन भूमि से जुड़े दस्तावेजों और न्यायालयीन आदेशों का परीक्षण किया जा रहा है।
प्रशासन के मुताबिक, संबंधित विभागों से प्राप्त जानकारी के आधार पर भूमि की उपलब्धता, पूर्व में किए गए आवंटन और संबंधित व्यक्तियों के दावों की जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त अभिलेख और तथ्यात्मक जानकारी भी जुटाई जाएगी।
मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की तैयारी
एक ओर डूब प्रभावित लंबित भूमि आवंटन और अपने अधिकारों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच जारी है। जल सत्याग्रह के तीसरे दिन नौ आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ने से आंदोलन की गंभीरता बढ़ गई है। अब इस मामले में प्रशासन की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर प्रभावितों की नजर टिकी हुई है।

