Ethanol Production: पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के बारे में बढ़ती चर्चाओं के साथ कई लोग इस बात को लेकर काफी हैरान होते हैं कि क्या एथेनॉल का उत्पादन घर पर भी किया जा सकता है. वैज्ञानिक रूप से एथेनॉल जैविक और रासायनिक प्रक्रियाओं के जरिए से बनाया जाता है. इसमें चीनी को अल्कोहल में बदला जाता है. हालांकि कमर्शियल, ईंधन या बड़े पैमाने के उद्देश्यों के लिए एथेनॉल का उत्पादन भारत में सख्त कानून के नियमों के अधीन है.
क्या है एथेनॉल?
एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है जो आमतौर पर चीनी या फिर स्टार्च युक्त कृषि उत्पादों जैसे की गन्ना, मक्का, चावल और फलों से बनाया जाता है. इसका व्यापक रूप से उद्योग, दवा, सैनिटाइजर और ईंधन जैसी चीजों में इस्तेमाल किया जाता है.
एथेनॉल का उत्पादन कैसे होता है?
एथेनॉल के उत्पादन में आमतौर पर दो वैज्ञानिक चरण शामिल होते हैं. पहले चरण में प्राकृतिक शर्करा को खमीर की मदद से फर्मेंटेशन के जरिए अल्कोहल में बदला जाता है. दूसरे चरण में अल्कोहल को औद्योगिक डिस्टिलेशन प्रणाली की मदद से अलग और शुद्ध किया जाता है. फर्मेंटेशन के बाद जो तरल मिलता है उसमें सिर्फ सीमित प्रतिशत अल्कोहल होता है. इसे औद्योगिक या फिर ईंधन संबंधी इस्तेमाल के लिए इसकी शुद्धता बढ़ाने के लिए आगे संसाधित किया जाता है.

डिस्टिलेशन क्यों जरूरी?
डिस्टिलेशन वह प्रक्रिया है जिसका इस्तेमाल फर्मेंटेड मिश्रण में मौजूद दूसरे पदार्थ से अल्कोहल को अलग करने के लिए किया जाता है. क्योंकि एथेनॉल और पानी के बॉलिंग पॉइंट अलग-अलग होते हैं, औद्योगिक प्रणालियों एथेनॉल को अलग कर सकती हैं और इसकी कंसंट्रेशन बढ़ा सकती हैं.
भारत में कानूनी स्थिति
जबकि एथेनॉल उत्पादन के पीछे का विज्ञान काफी जाना पहचाना है लेकिन इसके बावजूद भी आवश्यक अनुमति के बिना एथेनॉल का उत्पादन और डिस्टिलिंग कानूनी नियमों का उल्लंघन कर सकते हैं. ईंधन, व्यावसायिक इस्तेमाल या फिर बिक्री के लिए एथेनॉल सरकारी कंट्रोल, लाइसेंस की जरूरत और सुरक्षा मानकों के अधीन है.
एथेनॉल के उत्पादन में कई सुरक्षा चिंताएं भी शामिल हैं. फर्मेंटेशन से ऐसी गैसें उत्पन्न हो सकती हैं जिनके लिए उचित वेंटिलेशन की जरूरत होती है. इसी के साथ अल्कोहल काफी ज्यादा ज्वलनशील होता है. जोखिम को कम करने के लिए औद्योगिक सुविधाएं खास उपकरण और सुरक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल करती हैं.
