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वक्त के गुलाम नहीं हैं यहां के लोग, मीटिंग या पार्टी में लेटलतीफी को क्यों मानते हैं शिष्टाचार?

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दुनियाभर में जब भी वक्त की पाबंदी और अनुशासन की बात आती है, तो स्विट्जरलैंड और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है. इन देशों के ठीक उलट इटली के लोगों को उनकी खास लेटलतीफी के लिए जाना जाता है. इटली के निवासियों का साफ मानना होता है कि जीवन को जीवन की तरह जीना चाहिए, किसी मशीन की तरह नहीं. वे समय के कैदी बनकर घुट-घुट कर जीने में बिल्कुल विश्वास नहीं रखते हैं. इतालवी संस्कृति में समय को मानवीय संबंधों और खुशहाल जिंदगी से ऊपर कभी नहीं रखा जाता है. वहां समय को लेकर समाज में एक अलग ही अनूठा नजरिया विकसित हुआ है.

लचीली नदी जैसा बहता है वक्त

इटली के समाज में समय को किसी कड़े या लोहे के बंधन की तरह नहीं देखा जाता है. इतालवी लोग वक्त को एक लचीली नदी की तरह देखते हैं जो अपनी मर्जी से बहती है. वहां के सामाजिक ताने-बाने में एक अघोषित और सर्वमान्य नियम बना हुआ है. इस नियम के मुताबिक अगर आप किसी सामाजिक मुलाकात या गेट-टुगेदर के लिए 15 से 20 मिनट देर से पहुंचते हैं, तो उसे ‘देरी’ नहीं माना जाता है. वहां के लोग इस लेटलतीफी को असभ्यता की जगह बल्कि अपने शिष्टाचार का एक बेहद जरूरी हिस्सा मानते हैं.

खूबसूरत जिंदगी का फलसफा

इस अनोखी और तनावमुक्त जीवनशैली को इटली में ‘ला दोल्चे विता’ के नाम से पुकारा जाता है. इसका सीधा और सरल अर्थ होता है खूबसूरत और सुकून भरी जिंदगी. यह एक ऐसी जीवनशैली का हिस्सा है जहां घड़ी की सुइयां इंसानों को अपनी उंगलियों पर नहीं नचाती हैं. इटली के लोगों के पास अपनी इस लेटलतीफी का एक बहुत ही खूबसूरत और तार्किक बचाव भी हमेशा तैयार रहता है. वे पूरी दुनिया के सामने गर्व से कहते हैं कि वे घड़ी के गुलाम बनकर अपनी जिंदगी को बर्बाद नहीं करना चाहते हैं.

रिश्तों को देते हैं प्राथमिकता

इतालवी नागरिकों के लिए किसी दफ्तर के जरूरी फैसले से ज्यादा महत्वपूर्ण सामने बैठे इंसान से खुलकर बात करना होता है. वे गरम कॉफी का लुत्फ उठाना और जिंदगी को हर पल खुलकर जीना ज्यादा पसंद करते हैं. यही वजह है कि उनकी यह लेटलतीफी दुनिया को अखरने या गुस्सा दिलाने के बजाय अक्सर एक मीठी मुस्कान बिखेर देती है. इसके कारण अक्सर कई मजेदार सियासी और सामाजिक किस्से भी बन जाते हैं. इतालवी लोग पूरी दुनिया में अपनी इसी लेटलतीफी के लिए मशहूर हैं. वे आमतौर पर हर जगह 10 मिनट लेट ही पहुंचते हैं.

इतालवी समय का अजब नियम

इटली के लोगों के दिन की शुरुआत ही सुबह कॉफी बार में दोस्तों के साथ बातों की लंबी बैठकी लगाने से होती है. वे आराम से जिंदगी जीने को भगवान की सबसे बड़ी नियामत और वरदान मानते हैं. इटली के कई हिस्सों में किसी बड़ी पार्टी, पारिवारिक डिनर या किसी भी नॉन-ऑफिशियल मीटिंग में बिल्कुल ठीक समय पर पहुंचना अक्सर बहुत जल्दी आ जाना माना जाता है. वहां किसी भी आयोजन में 10-15 मिनट की देरी से पहुंचना बेहद सामान्य और अपेक्षित है. इसे वहां के लोग अक्सर गर्व से ‘ल’ओरा इटालियाना’ यानी इतालवी समय कहते हैं.

 

 

बदहवासी की दौड़ से दूरी

वहां के लोग समय पर कहीं पहुंचने के लिए सड़कों पर बदहवाश होकर या हांफते हुए भागना बिल्कुल पसंद नहीं करते हैं. वे कहीं भी बेहद शांत दिमाग और गरिमापूर्ण तरीके से पहुंचने में गहरा विश्वास रखते हैं. इटालियन संस्कृति में सामाजिक रिश्तों को निभाना और जीवन का भरपूर आनंद लेना ही सर्वोच्च प्राथमिकता माना जाता है. इटली की खूबसूरत सड़कों, ऐतिहासिक चौक-चौराहों और सजी हुई कॉफी शॉप्स में सुबह की लंबी बैठकियां देखना वहां का एक बेहद आम और रोज का दृश्य बन चुका है.

सड़कें हैं लोगों का मिलन स्थल

इटली में सड़कें और गलियां सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह आने-जाने का रास्ता मात्र नहीं हैं. वहां की सड़कों को लोग एक पवित्र मिलन स्थल के रूप में देखते हैं. वहां के समाज में सुबह की कॉफी पीना महज एक आदत नहीं बल्कि एक धार्मिक क्रिया की तरह निभाई जाती है. यह सुबह की बैठक केवल कॉफी का स्वाद लेने के लिए नहीं होती है. इसका मुख्य उद्देश्य तो अपने दिन की शुरुआत किसी जाने-अनजाने व्यक्ति से बातचीत करने, गर्मजोशी से हाथ मिलाने या गले मिलने के लिए की जाती है.

मेहमान का अनोखा सम्मान

अगर इटली में कोई व्यक्ति आपके घर अचानक आ गया, तो आप उसके सत्कार में दूसरी जगह जाने के लिए लेट हो सकते हैं. यह बात वहां के समाज में बहुत ज्यादा देखने को मिलती है. वहां मेहमान का घर पर आना एक बहुत बड़ा सम्मान माना जाता है. अगर कोई आपके दरवाजे पर दस्तक देता है, तो उसे अनदेखा करके किसी दूसरी मीटिंग के लिए भागना बेहद अपमानजनक माना जाता है. मेहमान के लिए अपना कीमती समय रोक देना और उसे पूरा ध्यान देना ही वहां का मुख्य नियम है.

इटली के लोगों का अनूठा फलसफा

मेहमान को अच्छी शराब, स्वादिष्ट खाना और कॉफी पिलाना ही इटली का असली शिष्टाचार माना जाता है. इटली में एक पुरानी कहावत अक्सर दोहराई जाती है कि जो धीरे चलता है, वह स्वस्थ चलता है और जिंदगी में बहुत दूर तक जाता है. यह कमाल का फलसफा इटली के लोगों की रग-रग में पूरी तरह से बसा हुआ है. वे आधुनिक दुनिया की उस अंधी ‘चूहा-दौड़’ को सिरे से खारिज करते हैं जो इंसान को हर वक्त मानसिक तनाव, डिप्रेशन और हड़बड़ी में रखती है.

जीने की कला का विकास

इतालवी लोगों का अटूट मानना है कि हमेशा समय का पीछा करने से इंसान को सिर्फ तनाव और मानसिक बीमारियां ही मिलती हैं. उनके लिए जिंदगी का असली मतलब सिर्फ कोल्हू के बैल की तरह काम करना या अंधाधुंध पैसा कमाना नहीं है. वे जीवन को ‘जीने की कला’ के रूप में देखते हैं. वे अपने जीवन के किसी भी काम को हड़बड़ी या जल्दबाजी में करना पसंद नहीं करते हैं. शाम को अपना काम खत्म करने के बाद वे दोस्तों के साथ बैठकर आराम से वाइन पीते हैं.

स्लो फूड आंदोलन की क्रांति

शाम के समय सुकून से गलियों में टहलना उनके मानसिक स्वास्थ्य को हमेशा तरोताजा और ऊर्जा से भरपूर रखता है. आज पूरी दुनिया को जहां ‘फास्ट फूड’ की खतरनाक बीमारी लग रही थी, वहीं इटली ने इसके विरोध में वैश्विक स्तर पर ‘स्लो फूड आंदोलन’ की शुरुआत की थी. इटली में दोपहर के खाने यानी लंच को एक बेहद पवित्र समय माना जाता है. यहां के लोग कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर या गाड़ी चलाते हुए सैंडविच चबाना बेहद गलत आदत मानते हैं.

सेहत और स्वाद का राज

दोपहर के भोजन के समय लोग बकायदा पूरी डाइनिंग टेबल पर बैठेंगे. वे अपने पूरे परिवार या दोस्तों के साथ लंबी बातचीत करेंगे. वे ताजा पके हुए गर्म खाने के हर एक निवाले को धीरे-धीरे स्वाद लेकर चबाएंगे. यह ‘धीमा खाना’ ही उनके बेहतरीन पाचन, तंदुरुस्ती और अच्छी सेहत का सबसे बड़ा राज माना जाता है. घड़ी की सुइयों को पीछे छोड़कर अपनों के साथ वक्त बिताना ही इटली के लोगों को दुनिया के बाकी देशों से पूरी तरह अलग और बेहद खास बनाता है.

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