धमतरी/ छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ किसान नेता एवं लेखराम साहू ने वर्ष 2026 के राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस से अपनी औपचारिक दावेदारी पेश की है। राजधानी रायपुर स्थित राजीव भवन में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर उन्होंने सांसद प्रत्याशी के रूप में अपनी इच्छा जताई। उनकी दावेदारी को संगठनात्मक निरंतरता, सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक संतुलन के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2026 में दो सीटें होंगी रिक्त
अप्रैल 2026 में छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दो सीटें रिक्त होने जा रही हैं। इनमें एक सीट पर भारतीय जनता पार्टी और एक सीट पर कांग्रेस का प्रतिनिधित्व संभावित बताया जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस के लिए यह चुनाव केवल औपचारिक प्रक्रिया न होकर किसान, ग्रामीण और पिछड़ा वर्ग के सशक्त प्रतिनिधित्व का अवसर माना जा रहा है।
कार्यकर्ताओं ने जताया समर्थन
धमतरी सहित विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता रायपुर पहुंचे। ग्रामीण क्षेत्रों से आए किसान प्रतिनिधियों, पिछड़ा वर्ग के सामाजिक कार्यकर्ताओं और पार्टी समर्थकों ने एकजुट होकर लेखराम साहू की उम्मीदवारी का समर्थन किया। उनका कहना है कि संगठन और क्षेत्रीय संतुलन को देखते हुए स्थानीय और जमीनी नेता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि साहू की दावेदारी कांग्रेस के पारंपरिक समर्थक वर्ग—विशेषकर किसान और पिछड़ा समाज—को पुनः संगठित करने की रणनीति का संकेत हो सकती है।

“पैराशूट नहीं, स्थानीय उम्मीदवार हो”
समर्थकों ने यह भी कहा कि अक्सर जब किसी सीट पर जीत सुनिश्चित होती है, तो बाहरी या “पैराशूट” उम्मीदवार उतारे जाते हैं। उनका मत है कि 2018 में विषम परिस्थितियों में भी लेखराम साहू ने मजबूती से चुनावी लड़ाई लड़ी थी, इसलिए इस बार उन्हें अवसर दिया जाना चाहिए। साहू समाज के प्रतिनिधियों ने भी पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर अपनी मांग रखी।
लेखराम साहू का राजनीतिक सफर
61 वर्षीय लेखराम साहू का राजनीतिक जीवन ग्राम सिलौटी के सरपंच से शुरू हुआ। इसके बाद वे कुरूद कृषि उपज मंडी के सदस्य रहे।
-
2008 से 2013 तक कुरूद विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे।
-
2018 में राज्यसभा के लिए सांसद प्रत्याशी रहे।
-
कांग्रेस में धमतरी जिला अध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री का दायित्व निभाया।
-
वर्तमान में अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक हैं।
अब निगाहें कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के निर्णय पर टिकी हैं। देखना होगा कि 2026 का राज्यसभा चुनाव पार्टी के लिए केवल एक औपचारिक प्रक्रिया रहेगा या सामाजिक संदेश देने का सशक्त मंच बनेगा।
