जैसे जैसे ठंड दस्तक दे रही है, वैसे वैसे राजधानी में लोगों का सांस लेना मुश्किल हो रहा है. बीते दिन को दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई और 3 नवंबर की सुबह घने धुंध और धीमी हवाओं के कारण प्रदूषक कण वातावरण में ठहर गए, जिससे सांस लेना भी मुश्किल हो गया.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 24 घंटे का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 366 दर्ज किया गया, जबकि वजीरपुर, बुराड़ी और अशोक विहार जैसे इलाकों में AQI 400 से अधिक पहुंच गया. परिवहन, पराली का धुआं और ठहरी हवा प्रदूषण के प्रमुख कारण बने हुए हैं.

कई इलाकों में ‘बहुत खराब’
दिल्ली के विभिन्न इलाकों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब रही. वजीरपुर में AQI 394, बुराड़ी क्रॉसिंग पर 387, अशोक विहार में 373, पंजाबी बाग में 360 और चांदनी चौक में 359 दर्ज किया गया. वहीं, लोधी रोड और IGI एयरपोर्ट जैसे इलाकों में कुछ राहत रही जहां AQI क्रमशः 219 और 293 दर्ज हुआ. DPCC और IMD के डेटा के मुताबिक, औसतन अधिकांश स्थानों पर हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रही. तीन निगरानी केंद्रों में AQI 400 से ऊपर पहुंचा जो ‘गंभीर’ स्तर माना जाता है.
धीमी हवाओं से नहीं हो रहा प्रदूषकों का फैलाव
दिल्ली की वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (AQEWS) के अनुसार, उत्तर-पश्चिम दिशा की हवा की गति बेहद कम हो गई. इससे प्रदूषक कणों का फैलाव रुक गया और हवा में उनका घनत्व बढ़ गया. CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, पीएम 2.5 का स्तर 189.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 10 का स्तर 316 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गया. इन स्तरों पर हवा में मौजूद सूक्ष्म कण सांस लेने में कठिनाई, खांसी, और आंखों में जलन पैदा कर सकते हैं.
आगे भी राहत के आसार कम, ‘बहुत खराब’ बनी रहेगी स्थिति
AQEWS ने अनुमान जताया है कि 4 नवंबर तक दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में ही बनी रहेगी. विशेषज्ञों का कहना है कि पराली जलने और वाहन उत्सर्जन के साथ मौसम की स्थिरता मिलकर प्रदूषण को और बढ़ा रही है. मौसम विभाग ने हल्के कोहरे के साथ अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम 15 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान जताया है. फिलहाल, राजधानी में हालात यह हैं कि लोगों को सुबह और शाम घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है.
