मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार ने अधिकारियों को दिए निर्देश
धमतरी/ 01 नवम्बर भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) का कार्य पारदर्शी और सुव्यवस्थित ढंग से जारी है। इसी क्रम में प्रशिक्षण एवं तैयारी का कार्य भी निरंतर चल रहा है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार ने विगत दिवस सभी जिला निर्वाचन अधिकारी, एआरओ और ईआरओ की वर्चुअल बैठक लेकर विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के सुचारू संचालन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि “निर्वाचक नामावलियों की शुद्धता, समावेशिता एवं पारदर्शिता ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया की आत्मा है। प्रत्येक स्तर पर सावधानीपूर्वक कार्य किया जाए ताकि प्रत्येक पात्र मतदाता का नाम सूची में जुड़ सके और अपात्र नाम स्वतः हटाए जा सकें।”
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी कक्ष में कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी अबिनाश मिश्रा, उप जिला निर्वाचन अधिकारी पवन प्रेमी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

निर्वाचक नामावली पुनरीक्षण की समय-सीमा
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28 अक्तूबर – 03 नवम्बर 2025: तैयारी, प्रशिक्षण एवं मुद्रण कार्य
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04 नवम्बर – 04 दिसम्बर 2025: गणना अवधि
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04 दिसम्बर 2025: मतदान केन्द्रों का युक्तियुक्तकरण एवं पुनर्व्यवस्था
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05 – 08 दिसम्बर 2025: नियंत्रण तालिका अद्यतन एवं प्रारूप नामावली तैयारी
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09 दिसम्बर 2025: प्रारूप निर्वाचक नामावली का प्रकाशन
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09 दिसम्बर 2025 – 08 जनवरी 2026: दावा-आपत्ति अवधि
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09 दिसम्बर 2025 – 31 जनवरी 2026: सूचना, सुनवाई, सत्यापन एवं निर्णय
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03 फरवरी 2026 तक: अंतिम प्रकाशन हेतु आयोग से अनुमति
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07 फरवरी 2026: निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन
बैठक के बाद कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी बीएलओ, ईआरओ एवं एआरओ अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहकर घर-घर संपर्क के माध्यम से पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ें तथा डुप्लीकेट या अपात्र प्रविष्टियाँ हटाएँ। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में दिए गए दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए तथा जिला स्तर पर गठित निगरानी समितियाँ प्रत्येक चरण की प्रगति की नियमित समीक्षा करें।
उन्होंने कहा, “निर्वाचन कार्य केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करने का माध्यम है।”
