अक्सर परिवारों में प्रॉपर्टी को लेकर विवाद होते हैं, लेकिन कई बार ये विवाद इतना बढ़ जाते हैं कि मामला कोर्ट तक पहुंच जाता है. ऐसा ही मामला आंध्र प्रदेश से सामने आया है, जहां पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर भाई-बहनों में विवाद चल रहा था. इस मामले में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है, जिसमें कोर्ट ने कहा कि छह सौतेली बहनें भी अपने पिता की पैतृक संपत्ति में बराबर की हकदार हैं.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह मामला आंध्र प्रदेश के काकीनाडा स्थित दो पैतृक संपत्तियों को लेकर था. सोमराजू नाम के एक व्यक्ति की पहली पत्नी से दो बच्चे थे एक बेटा और एक बेटी. पहली पत्नी का निधन हो गया, जिसके बाद उन्होंने दूसरी शादी की, जिससे उसकी छह बेटियां हुई. बाद में भाई-बहनों में पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हुआ. बेटे ने अपनी छह सौतेली बहनों को संपत्ति में हिस्सा देने से मना कर दिया, जिसके बाद यह मामला कोर्ट तक पहुंच गया.

बहनों को भाई ने क्यों नहीं दिया हिस्सा?
इस मामले पर सौतेले भाई का कहना था कि उनके पिता ने पहले ही रिलिंक्विशमेंट डीड के जरिए अपने अधिकार छोड़ दिए थे. इसी दस्तावेज के जरिए सौतेले भाई ने दावा किया कि उसकी छह बहनों का संपत्ति में हिस्सेदार बनने का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन साथ ही पिता ने कोर्ट में कहा कि उसने खुद से रिलिंक्विशमेंट डीड पर अंगूठा नहीं लगाया था, बल्कि उससे इस दस्तावेज पर धोखे से अंगूठा लगवाया गया था, लेकिन जब बाद में पता चला तो उन्होंने इसे रद्द कराने की कार्रवाई भी की थी.
मामले पर हाई कोर्ट ने क्या कहा?
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का कहना था कि पैतृक संपत्ति में बेटियों का अधिकार होता है और यह अधिकार कानून से मिलता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि जब छह बेटियां पिता की ही संतान हैं तो उन्हें संपत्ति में हिस्सा मिलना चाहिए और इसे कोई रोक नहीं सकता है. इसके साथ ही कार्ट ने रिलिंक्विशमेंट डीड पर भी स्पष्ट किया कि अगर इस दस्तावेज को सही भी माना जाए तब भी पिता सिर्फ अपना हिस्सा छोड़ सकते हैं न कि इससे अन्य कानूनी अधिकार को खत्म नहीं कर सकते हैं.
