विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में किसानों के लिए खाद-बीज की उपलब्धता, अमृत मिशन के तहत पेयजल आपूर्ति और औद्योगिक दुर्घटनाओं में जवाबदेही जैसे मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच जमकर टकराव देखने को मिला. विपक्ष ने खाद-बीज की कमी को लेकर सरकार को घेरा, नारेबाजी की और गर्भगृह में पहुंचने पर विपक्षी सदस्य खुद निलंबित हो गए. वहीं वेदांता प्लांट हादसे और औद्योगिक सुरक्षा को लेकर भी सदन में तीखी बहस हुई.
प्रश्नकाल की शुरुआत अमृत मिशन योजना से हुई. भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने रायपुर शहर में पेयजल आपूर्ति का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार अभी भी करीब 1.21 लाख घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है. उन्होंने यह भी जानना चाहा कि योजना पूरे शहर के लिए लागू की जा रही है या वार्डवार काम हो रहा है.

इस पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) मंत्री अरुण साव ने बताया कि फिलहाल करीब 2.21 लाख घरों तक जलापूर्ति की जा रही है. उन्होंने कहा कि जिन घरों तक अभी पाइपलाइन नहीं पहुंची है, वहां भी तेजी से काम चल रहा है और सभी घरों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य है.
खाद-बीज के मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा
शून्यकाल में कांग्रेस ने किसानों के लिए खाद और बीज की उपलब्धता को लेकर स्थगन प्रस्ताव पेश किया. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने डीएपी खाद की कमी, अमानक खाद की सप्लाई और किसानों को हो रही परेशानियों का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया.
