पारंपरिक लोककथा गायन शैली पंडवानी को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाली प्रख्यात लोकगायिका तीजन बाई का रविवार को रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. लोकगायिका तीजन बाई के निधन पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय दुख जताया और रायपुर AIIMS पहुंचकर श्रद्धांजलि दी.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) रायपुर पहुंचकर पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी. उन्होंने शोकाकुल परिजनों से भेंट कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं.
पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना और विलक्षण प्रतिभा से उन्होंने पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई तथा छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया. डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है. इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे.

रविवार सवा तीन बजे आखिरी सांस ली
पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई ने आज रविवार तड़के सवा तीन बजे आखिरी सांस ली. एम्स में 27 मई से उनका उपचार किया जा रहा था. उन्होंने अपनी प्रस्तुतियों के ज़रिए छत्तीसगढ़ की लोककला को दुनिया भर में एक अलग पहचान दिलाई. तीजन बाई दुर्ग जिले से थीं. अपनी दमदार आवाज, मंच पर प्रभावशाली उपस्थिति और भावपूर्ण प्रस्तुति शैली के लिए प्रसिद्ध तीजन बाई ने पंडवानी को एक क्षेत्रीय लोक परंपरा से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित लोककला का दर्जा दिलाया. पंडवानी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला है, जिसमें महाभारत के प्रसंगों को प्रभावशाली कथा-वाचन, लोकगायन और संगीत के साथ जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाता है.
