जब एक मिसाइल गर्जना के साथ आसमान का सीना चीरती हुई निकलती है, तो उसकी रफ्तार देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसे पलक झपकते ही हजारों किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड कैसे मिलती है? यह कोई जादू नहीं, बल्कि इसके अंदर भरा हुआ एक खास तरह का हाई-एनर्जी ईंधन है. आम गाड़ियों में डलने वाले पेट्रोल या डीजल से उलट, मिसाइलों में ऐसा बारूदी मिश्रण इस्तेमाल होता है जो कुछ ही सेकंड में इतना जबरदस्त धक्का पैदा करता है कि मिसाइल आवाज की गति को भी पीछे छोड़ देती है.
ये है मिसाइल का असली पावर हाउस
अक्सर लोग यह समझते हैं कि मिसाइलें भी हवाई जहाजों की तरह सामान्य ईंधन से उड़ती होंगी, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. मिसाइलों को उड़ाने के लिए हाई-एनर्जी रॉकेट फ्यूल की जरूरत होती है. पेट्रोल या डीजल में इतना ऊर्जा घनत्व नहीं होता है कि वे भारी-भरकम मिसाइल को गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ इतनी तेजी से ढकेल सकें. मिसाइल का ईंधन ऐसा होना चाहिए जो बहुत कम समय में बहुत ज्यादा गैस पैदा करे, ताकि उसे जबरदस्त थ्रस्ट या धक्का मिल सके.

सॉलिड फ्यूल
ज्यादातर बैलिस्टिक मिसाइलों, जैसे भारत की अग्नि-V (Agni-V) में सॉलिड फ्यूल यानी ठोस ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें HTPB (Hydroxyl-Terminated Polybutadiene) जैसे पॉलिमर को अमोनियम परक्लोरेट जैसे ऑक्सीडाइजर के साथ मिलाकर एक रबर जैसा पेस्ट बनाया जाता है. इसे रॉकेट मोटर के केसिंग में ही भर दिया जाता है. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे सालों तक स्टोर किया जा सकता है और युद्ध के समय मिसाइल को तुरंत लॉन्च किया जा सकता है. एक बार इसमें आग लग गई, तो यह लगातार जलता रहता है.
