दुनिया के नौ देशों के पास इस वक्त करीब 15000 परमाणु हथियार मौजूद हैं. यह संख्या इतनी ज्यादा है कि पूरी पृथ्वी से इंसानों को कई बार खत्म किया जा सकता है. परमाणु बम का असर सिर्फ धमाके तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि इसकी गर्मी, सदमे की लहर और रेडिएशन मिलकर कुछ ही सेकंड में तबाही शुरू कर देते हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में यह भी सवाल आता है कि आखिर परमाणु बम फटते ही क्या होता है और इसकी गर्मी कितनी खतरनाक होती है. चलिए तो आज हम आपको बताते हैं कि एक परमाणु बम फटने पर कितनी गर्मी पैदा होती है और तबाही की शुरुआत कैसे होती है.
विस्फोट के साथ ही उठती है आग की गेंद
परमाणु बम फटने के कुछ ही सेकंड में एक विशाल आग का गोला यानी फायरबॉल बनता है. इसका तापमान लाखों से लेकर कई मिलियन डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. वहीं इतनी भीषण गर्मी में विस्फोट के बहुत करीब मौजूद हर चीज पल भर में जलकर राख हो जाती है. वैज्ञानिकों के अनुसार, इस गर्मी से मानव शरीर तक वाष्पीकृत हो सकता है. इसके अलावा विस्फोट के समय एक तेज चमक दिखाई देती है, जो बिजली की कौंध से भी कई गुना ज्यादा तेज होती है. यह रोशनी आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है और कई लोग अस्थायी या स्थायी रूप से अंधे हो सकते हैं. इसके तुरंत बाद निकलने वाली थर्मल रेडिएशन आसपास के बड़े इलाकों में आग लगा देती है. कपड़े, लकड़ी, पेड़ और इमारतें तक जल उठती है जिससे आग का तूफान यानी फायरस्ट्राॅम बन जाता है.

सदमे की लहर खत्म कर देती है शहर
परमाणु बम फटने के बाद गर्मी और रोशनी होने के बाद सबसे खतरनाक शॉक वेव यानी सदमे की लहर होती है. यह लहर सैकड़ों किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से फैलती है. वहीं विस्फोट के आसपास मौजूद लोग इसकी चपेट में आकर तुरंत मारे जा सकते हैं. दूर मौजूद लोगों के फेफड़ों को नुकसान, कान के पर्दे फटना, और अंदरूनी ब्लीडिंग जैसी गंभीर चोटें लग सकती है. इमारतें ढह जाती है और उड़ता हुआ मलबा लोगों की जान ले लेता है. इसके अलावा कई मामलों में भूमिगत बंकर या शेल्टर भी लोगों को नहीं बचा पाते हैं. आग और धूएं के कारण ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, वहीं कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस दम घोंट देती है. ऐसे में जो लोग शुरुआती विस्फोट से बच भी जाते हैं, उनकी जान बाद में जा सकती है.
पूरी दुनिया पर पढ़ सकता है असर
परमाणु बम विस्फोट के बाद आयनकारी रेडिएशन फैलता है, जो तुरंत और लंबे समय दोनों में नुकसान करता है. इसके संपर्क में आए लोग बीमार पड़ सकते हैं या उनकी मौत हो सकती है. वहीं लंबे समय में कैंसर और जेनेटिक नुकसान का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. रेडियोएक्टिव फॉलोआउट पर्यावरण को भी दूषित कर देता है. इसके अलावा विशेषज्ञों के अनुसार अगर परमाणु हथियारों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ तो इसका असर सिर्फ एक शहर या देश तक सीमित नहीं रहेगा, इससे वैश्विक जलवायु बिगड़ सकती है.
