Land Of Pirates: सोमालिया को समुद्री डाकुओं की जमीन कहा जाता है. दशकों तक सोमाली समुद्री डाकुओं ने दुनिया भर की सुर्खियों में जगह बनाई है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बाधित किया है और दुनिया भर की नौसेनाओं को अपने पानी में गश्त लगाने के लिए मजबूर किया है. लेकिन सोमालिया की समुद्री डाकुओं वाली बदनामी रातों-रात नहीं हुई थी. आइए जानते हैं कि यह देश समुद्री डाकुओं से कैसे जुड़ा.
सोमालिया समुद्री डाकुओं से कैसे जुड़ा?
हिंद महासागर और अदन की खाड़ी के साथ इस देश का लंबा समुद्र तट इस दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक पर रखता है. जब जमीन पर कानून व्यवस्था खत्म हो गई तब समुद्र अराजकता और मौकों की अगली सीमा बन गया.
गृह युद्ध से लेकर बिना सुरक्षा वाले तट तक
सोमाली समुद्री डाकूगिरी की जड़ें 1991 में सोमालिया की केंद्र सरकार के गिरने से शुरू हुई. जैसे ही देश गृह युद्ध की चपेट में आया नौसेना के साथ राष्ट्रीय संस्थान ने काम करना बंद कर दिया. कोई कोस्ट गार्ड और कोई समुद्री निगरानी ना होने की वजह से इस देश का समुद्री इलाका पूरी तरह से असुरक्षित हो गया. यही वजह थी कि समुद्र को समुद्री डाकुओं ने कब्जा लिया.

अवैध मछली पकड़ना और जहरीला कचरा फेंकना
विदेशी मछली पकड़ने वाले जहाजों ने जल्द ही इस स्थिति का फायदा उठाया. उन्होंने सोमाली पानी से अवैध रूप से मछलियों को पकड़ना शुरू कर दिया और साथ ही तट के किनारे जहरीला कचरा फेंकना शुरू कर दिया. स्थानीय मछुआरा समुदायों की रोजी-रोटी खत्म हो चुकी थी और समुद्री इकोसिस्टम को जहर दे दिया गया था. देश की सुरक्षा न होने की वजह से मछुआरों को खुद ही अपना बचाव करना पड़ा.
शुरुआत में सोमाली मछुआरों ने विदेशी ट्रॉलर को भगाने के लिए छोटे हथियारबंद समूह बनाए. उन्होंने खुद को सोमाली कोस्ट गार्ड कहा. उन्होंने इस बात का दावा किया कि वे देश के द्वारा छोड़े गए समुद्री अधिकारों को लागू कर रहे हैं. हालांकि जब इनमें से कुछ समूहों ने इस बात का पता किया कि पकड़े गए जहाजों से फिरौती मिल सकती है तो बचाव और अपराध के बीच की रेखा धुंधली होने लगी.
बन गया एक मुनाफे वाला धंधा
वक्त के साथ समुद्री डाकू एक संगठित आपराधिक उद्योग की तरफ बढ़ गए. समुद्री डाकुओं ने बड़े माल वाहक जहाजों को हाईजैक करना, चालक दल को बंधक बनाना और लाखों डॉलर की फिरौती मांगना शुरू कर दिया. 2011 के आसपास अपने चरम पर सोमाली समुद्री डाकूगिरी से वैश्विक अर्थव्यवस्था को सालाना लगभग 7 बिलियन डॉलर का नुकसान होने का अनुमान था.
