28 जनवरी 2026 की सुबह बारामती में हुए विमान हादसे में अजित पवार का यूं अचानक दुनिया को अलविदा कहना कई गंभीर सवाल खड़े कर गया. उन्हीं की पार्टी एनसीपी के नेता अमोल मिटकरी के ताजा प्रतिक्रिया ने तो इस दुर्घटना को लेकर सार्वजनिक रूप से संदेह जताया है. अजित पवार की मृत्यु के एक हफ्ते के भीतर ही महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है.
बारामती में हुए विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के साथ पिंकी माली, विदीप जाधव, कैप्टन सुमित कपूर और कैप्टन शम्भावी पाठक की भी मौत हो गई थी. इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में उथल-पुथल मच गई है. अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है और उसी दिन एनसीपी नेताओं की अहम बैठक भी हुई. इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमोल मिटकरी की प्रतिक्रिया को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है.
धुआं नहीं था, लेकिन खतरा जरूर- अमोल मिटकरी
एनसीपी विधायक अमोल मिटकरी ने कहा कि विमान दुर्घटना के दौरान “धुआं नहीं था, लेकिन खतरा जरूर था”, इसलिए अजित दादा की मृत्यु को लेकर शत-प्रतिशत सच्चाई सामने आनी चाहिए. उन्होंने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से अपूरणीय क्षति हुई है और वे जीवित रहते हुए संघर्ष करेंगे. मिटकरी ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अजित पवार के परिवार के प्रति निष्ठावान रहेंगे और इस पूरे मुद्दे पर मई महीने में अपना रुख सार्वजनिक करेंगे.

सोशल मीडिया पोस्ट और उठाए गए सवाल
अमोल मिटकरी ने सोशल मीडिया पोस्ट में देवगिरी की दो खाली कुर्सियों का जिक्र करते हुए अपनी पीड़ा बताई और कई सवाल भी उठाए. उन्होंने कहा कि वे इस निधन का राजनीतिकरण नहीं करेंगे, लेकिन संदेहों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता.
पोस्ट में सवाल रखे गए- दुर्घटना में 6 लोगों की मौत बताई गई, तो सिर्फ 5 शव क्यों मिले? छठा व्यक्ति कहां गया? उड़ान से पहले यात्रियों की डिजिटल सूची होने के बावजूद विसंगति क्यों है? कोई कागज जला हुआ क्यों नहीं मिला? पायलटों को बार-बार क्यों बदला गया? अंत में उन्होंने लिखा कि सवाल पूछना गपशप नहीं, बल्कि सच्चाई की तलाश है.
