महाराष्ट्र में गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में मंत्री गिरीश महाजन के स्पीच से शुरू हुआ विवाद बढ़ता ही जा रहा है. बता दें कि नासिक में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में मंत्री गिरीश महाजन के भाषण के दौरान बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम न लिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया था. कार्यक्रम के दौरान एक महिला वन अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से चीख-चीख कर आपत्ति जताई. इसके बाद राज्यभर में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया तेज हो गई.
नासिक के सरकारी कार्यक्रम में मंत्री गिरीश महाजन के भाषण के बाद वन विभाग की कर्मचारी माधवी जाधव और दर्शना सौपुरे ने सवाल उठाया कि भाषण में संविधान निर्माता बाबासाहेब अंबेडकर का नाम क्यों नहीं लिया गया. इस सवाल के बाद कुछ देर के लिए कार्यक्रम स्थल पर तनावपूर्ण माहौल बन गया. पुलिस ने स्थिति संभालते हुए दोनों कर्मचारियों को हिरासत में लेकर सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन पहुंचाया. इस कार्रवाई के बाद नागरिकों ने थाने के बाहर जमा होकर मंत्री महाजन के खिलाफ नारेबाजी की और शिकायत दर्ज करने की मांग उठाई.

‘नीली कमीज’ वाले बयान के बाद गिरीश महाजन की सफाई
विवाद के बीच मंत्री गिरीश महाजन ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम से गहरा दुख हुआ है. उन्होंने कहा कि वे बाबासाहेब अंबेडकर की जयंती पर नियमित रूप से गांव और तालुका स्तर पर कार्यक्रमों में शामिल होते हैं और केवल औपचारिक माला चढ़ाकर लौटने वाले नेताओं में नहीं हैं. महाजन ने दावा किया कि वे मातंग और वाल्मीकि समुदाय सहित समाज के सभी वर्गों के बीच जाते हैं, उनके साथ भोजन करते हैं और दान भी देते हैं. उन्होंने कहा, “क्या ऐसा कभी हुआ है कि मैंने 40 सालों में नीली कमीज न पहनी हो?” साथ ही उन्होंने समाज में फूट न डालने की अपील की. हालांकि, उनके इस बयान को लेकर अब भी आलोचना जारी है.
शिकायत, मांग और विरोध
बता दें कि घटना के बाद माधवी जाधव और दर्शना सौपुरे ने मंत्री गिरीश महाजन के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिस पर पुलिस आगे की जांच कर रही है. वहीं वंचित बहुजन अघाड़ी के नेता प्रकाश अंबेडकर ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री महाजन के खिलाफ अत्याचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है. महिला वन रक्षक कर्मियों के संगठनों ने भी इस मांग का समर्थन किया है.
